कोरबा :- कोरबा तहसील के अंतर्गत आने वाले राजस्व ग्राम ढेलवाडीह (दादरखुर्द)में करोड़ों रुपए की जमीन घोटाला प्रकाश में आया है। दादरखुर्द के भूमाफियाओं ने तत्कालीन पटवारी से सांठगांठ करते हुए गलत तरीके से ढेलवाडीह के कचांदी नाला से लगे रापाखर्रा सरहद और चनवारी टिकरा की सरकारी जमीन को अपने अपने नाम पर चढ़वा लिया जिसमें से दो लोगों की मृत्यु हो गई है जबकि एक जीवित है। सूत्रों की मानें तो यह सारा खेल वर्ष 1970 - 85 का है जब ढेलवाडीह ग्राम दादरखुर्द पटवारी हल्का के अंतर्गत आता था और पटवारी का मुख्यालय दादरखुर्द होता था और इसी का फायदा उठाते हुए तत्कालीन दादरखुर्द के जमीन माफियाओं ने पटवारी को अपने प्रभाव में लेते हुए और सारे नियम कायदों को ताक में रखकर सरकारी जमीन का नया खसरा नंबर बनाकर अधिकार अभिलेख में अपने नाम दर्ज करवा लिये।
जब शासन प्रशासन द्वारा राजस्व रिकॉर्ड अधिकार अभिलेख के बदले में बी वन खसरा का निर्माण करवाया गया तब कभी भी किसी भी पटवारी द्वारा गलत तरीके से इन लोगों के नाम पर दर्ज सरकारी जमीन को चालू राजस्व रिकॉर्ड बी वन खसरा में इनके नाम पर नहीं चढ़ाया और ना ही कभी उस जमीन पर ये लोग काबिज रहे सिर्फ कागज में ही जमीन का मालिक बन बैठे और तो और ढेलवाडीह के किसी व्यक्ति को इनके नाम पर दर्ज जमीन के बारे में आज तक पता नही है।
उल्लेखनीय है कि मरने वाले दो लोगों की एक - एक वारिस ने और एक महिला भू माफिया ने वर्तमान राजस्व कर्मचारियों और अधिकारियों को गलत जानकारी देते हुए फिर से सरकारी जमीन को अपने नाम पर कर लिए और तीनों ने मिलकर उस सरकारी जमीन को तत्कालीन पटवारी से सांठगांठ करते हुए भालूसटका और दादरखुर्द के रहने वाले आदिवासी व्यक्तियों के सरकारी कब्जा वाले जमीन जो खरमोरा नकटीखार (भालूसटका)सरहद पर स्थित है इन लोगों ने जमीन देने के एवज़ में आदिवासी व्यक्तियों को लाखों रुपए दिया और फिर उसको अपना बताते हुए करोड़ों रुपए में बेच डाले जबकि एक महिला भू माफिया ने उस सरकारी जमीन को अपने छोटे बेटे और उसके साथी पाटर्नर के नाम पर रजिस्ट्री कर दिया है ताकि सरकारी जमीन को हड़पा जा सके इसके पीछे का मास्टर माइंड महिला भू माफिया का बड़ा बेटा है जो जमीन हेराफेरी के मामले में कई बार जेल जा चुका है और जिसे न्यायालय से एक मामले में सजा भी हुआ है।

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