कोरबा, छत्तीसगढ़ INTUC कोरबा के जिला अध्यक्ष शशांक ने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL) में भारत सरकार की प्रस्तावित Offer for Sale (OFS) के संबंध में माननीय राष्ट्रपति को प्रतिनिधित्व भेजकर मांग की है कि किसी भी स्थिति में सरकार की हिस्सेदारी 26% से नीचे न की जाए।
वर्तमान में सरकार की HZL में लगभग 27.92% हिस्सेदारी है। यदि प्रस्तावित लगभग 2% OFS किया जाता है, तो सरकार की हिस्सेदारी लगभग 25.92% रह जाएगी और वह 26% के महत्वपूर्ण threshold से नीचे चली जाएगी।
*26% हिस्सेदारी से जुड़े हैं महत्वपूर्ण अधिकार*
प्रतिनिधित्व में HZL के Shareholders’ Agreement (SHA) के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि 26% केवल एक सामान्य शेयरहोल्डिंग प्रतिशत नहीं है, बल्कि इससे सरकार के महत्वपूर्ण contractual governance rights जुड़े हुए हैं।
विशेष रूप से Article 4.1(d)(i) के अनुसार, जब तक सरकार के पास कम से कम 26% Share Capital है, सरकार को कम से कम 5 Government Nominee Directors नियुक्त करने का अधिकार है।
इसी प्रकार Articles 4.4(b) और 4.5(a) में Government Nominee Director की उपस्थिति तथा Government के affirmative voting rights को 26% की हिस्सेदारी से जोड़ा गया है।
प्रतिनिधित्व में यह भी कहा गया है कि Companies Act, 2013 की Section 114(2) के तहत Special Resolution के लिए votes in favour कम से कम votes against के तीन गुना होने आवश्यक हैं। इसलिए लगभग 26% की substantial minority holding Government को महत्वपूर्ण statutory blocking position प्रदान कर सकती है, हालांकि इसका प्रभाव संबंधित resolution में voting participation पर निर्भर करता है।
*ED, SEBI और MCA की regulatory scrutiny के बीच OFS पर सवाल*
प्रतिनिधित्व में HZL/Vedanta से संबंधित चल रही regulatory scrutiny को भी महत्वपूर्ण बताया गया है।
Enforcement Directorate द्वारा FEMA के तहत HZL/Vedanta के संबंध में कार्रवाई/search की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त SEBI और Ministry of Corporate Affairs (MCA) के स्तर पर भी कंपनी/प्रमोटर समूह से संबंधित regulatory scrutiny और proceedings का उल्लेख किया गया है।
ऐसे समय में सरकार द्वारा अपनी मौजूदा governance safeguards को 26% से नीचे जाकर कमजोर करना उचित नहीं होगा।
*सितंबर 1998 की Disinvestment Commission की सिफारिश भी महत्वपूर्ण*
प्रतिनिधित्व में सितंबर 1998 की Disinvestment Commission की HZL संबंधी recommendation का भी उल्लेख किया गया है।
Commission ने HZL की zinc industry में dominant position और उसके महत्वपूर्ण ore reserves को ध्यान में रखते हुए उस समय सरकार को 49% से आगे disinvestment न करने की सलाह दी थी।
Commission ने देश के exhaustible high-grade zinc resources के संरक्षण तथा continued Government control की आवश्यकता पर भी जोर दिया था और यह चिंता व्यक्त की थी कि near public monopoly को private monopoly में बदलने से कोई public purpose पूरा नहीं होगा।
*सरकार से 26% हिस्सेदारी बनाए रखने की मांग*
ऐसा कोई OFS तत्काल रोका/स्थगित किया जाए जिससे सरकार की हिस्सेदारी 26% से नीचे चली जाए;
SHA के Articles 4.1(d), 4.4(b), 4.5 और 4.6 के तहत Government के अधिकारों पर विस्तृत कानूनी राय ली जाए;
सितंबर 1998 की Disinvestment Commission recommendation को ध्यान में रखा जाए;
ED, SEBI और MCA से संबंधित ongoing regulatory scrutiny को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाए; तथा
HZL में सरकार की न्यूनतम 26% हिस्सेदारी सुरक्षित रखी जाए।
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