राजेश राठौर
दैनिक दर्पण न्यूज़
रायपुर। प्रदेश के 82 हजार सेवारत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, न्याय और सम्मान से जुड़े मुद्दों को लेकर शिक्षक साझा मंच अब आर-पार की लड़ाई के लिए मैदान में उतरने जा रहा है। तीन प्रमुख शिक्षक संगठनों—छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन, नवीन शिक्षक संघ एवं सर्व शिक्षक संघ—के संयुक्त आह्वान पर चरणबद्ध आंदोलन के दूसरे चरण में कल प्रदेश के सभी ब्लॉकों में धरना-प्रदर्शन के साथ “सेवा सुरक्षा न्याय रैली” का आगाज होगा।
शिक्षक साझा मंच का स्पष्ट कहना है कि वर्षों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को अपनी सेवाएं देने वाले सेवारत शिक्षकों के भविष्य को केवल TET की अनिवार्यता के आधार पर असुरक्षित नहीं किया जाना चाहिए। शिक्षकों को पहले TET परीक्षा में शामिल होने का पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराया जाए और उसके बाद ही किसी प्रकार की पदोन्नति अथवा सेवा संबंधी निर्णय लिया जाए।
“परीक्षा का अवसर दिए बिना पात्रता कैसे हासिल करेंगे शिक्षक?”
छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने कहा कि संगठन लंबे समय से सेवारत शिक्षकों के साथ TET के मुद्दे पर न्याय की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार और विभाग द्वारा शिक्षकों की पीड़ा को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। इससे प्रदेश के शिक्षकों में गहरा आक्रोश और असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो रही है।
उन्होंने कहा कि यदि सेवारत शिक्षकों के लिए TET आवश्यक है, तो सरकार उन्हें परीक्षा में शामिल होने का अवसर भी उपलब्ध कराए। “जब सरकार स्वयं TET परीक्षा आयोजित नहीं करेगी, तो आखिर सेवारत शिक्षक यह पात्रता कैसे प्राप्त करेंगे?” यह सवाल आज प्रदेश के हजारों शिक्षकों के मन में है।
श्री राठौर ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप सेवारत शिक्षकों को TET की पात्रता हासिल करने के लिए अवसर मिलना चाहिए। शिक्षकों का आरोप है कि एक ओर TET उत्तीर्ण नहीं होने के आधार पर वरिष्ठ शिक्षकों को पदोन्नति से वंचित करने की स्थिति बनाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा का पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। यह स्थिति शिक्षकों के लिए गंभीर अन्याय है।
वरिष्ठता और वर्षों की सेवा का सम्मान जरूरी
नवीन शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास राजपूत ने कहा कि शिक्षा विभाग में वर्षों तक अपनी सेवाएं देने वाले वरिष्ठ शिक्षकों को पदोन्नति के अधिकार से वंचित करना उनके साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षक को बिना पर्याप्त अवसर दिए उसकी सेवा, वरिष्ठता और पदोन्नति के अधिकार को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ शिक्षकों को हटाकर कनिष्ठ शिक्षकों की पदोन्नति की स्थिति उत्पन्न होना भविष्य में एक नई वेतन विसंगति और प्रशासनिक असंतोष को जन्म दे सकता है। सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर ऐसी स्थिति को रोकना चाहिए।
“शिक्षक सरकार से टकराव नहीं, न्याय चाहते हैं”
सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता इरफान सैय्यद ने कहा कि आज प्रदेश का सेवारत शिक्षक सरकार की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। शिक्षक सरकार से किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि अपने भविष्य की सुरक्षा, सम्मान और न्यायपूर्ण अवसर की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लगातार अनिश्चितता के बीच शिक्षक मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। जिन शिक्षकों ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में लगाए हैं, उनके भविष्य को लेकर ऐसी असुरक्षा उचित नहीं है।
सरकार से शिक्षक साझा मंच की प्रमुख मांगें
शिक्षक साझा मंच ने सरकार से मांग की है कि
सेवारत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
TET परीक्षा से वंचित सेवारत शिक्षकों को पर्याप्त एवं स्पष्ट अवसर उपलब्ध कराया जाए।
TET परीक्षा का आयोजन नियमित रूप से कर शिक्षकों को निर्धारित समय-सीमा में पात्रता प्राप्त करने का अवसर दिया जाए।
TET के कारण वर्षों से कार्यरत वरिष्ठ शिक्षकों की पदोन्नति प्रभावित न की जाए।
पदोन्नति में वरिष्ठता और सेवा अनुभव का उचित सम्मान किया जाए।
मोदी की गारंटी में किया गया वायदा पूरा किया जाए
शिक्षकों के भविष्य से जुड़े निर्णयों में शिक्षक संगठनों से सार्थक संवाद किया जाए।
शिक्षक साझा मंच ने कहा कि “यह आंदोलन किसी व्यक्ति या सरकार के विरोध में नहीं, बल्कि प्रदेश के 82 हजार सेवारत शिक्षकों के भविष्य और न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए है।”
मंच ने सरकार से अपील की है कि शिक्षकों की पीड़ा को आंदोलन की आवाज बनने से पहले समझा जाए और तत्काल सकारात्मक निर्णय लेकर प्रदेश के शिक्षकों को राहत दी जाए।
अब शिक्षक की मांग स्पष्ट है
“सेवा सुरक्षा चाहिए, TET का अवसर चाहिए और वर्षों की सेवा का सम्मान चाहिए।”
कल होने वाली सेवा सुरक्षा न्याय रैली इसी न्यायपूर्ण मांग की बुलंद आवाज बनेगी।



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