सेवा सुरक्षा मुद्दे पर बिना स्कूल बंद और पढ़ाई बाधित किए छत्तीसगढ़ के 146 विकासखंडों में शिक्षक साझा मंच ने रैली के जरिए मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन*

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राजेश राठौर 

दैनिक दर्पण न्यूज़ 


जाँजगीर, 22 अगस्त 2026।शिक्षक साझा मंच के आह्वान पर आज 22 अगस्त को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता, सेवा सुरक्षा, वरिष्ठता एवं अन्य शिक्षक समस्याओं को लेकर छत्तीसगढ़ के 146 विकासखंडों में एक साथ रैली, धरना एवं ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किया गया। शिक्षकों ने विकासखंड स्तर पर रैली निकालकर मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए अपनी मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग की।


इस आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय बात यह रही कि शिक्षकों ने आंदोलन भी किया और स्कूलों में पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होने दी। शिक्षक साझा मंच ने इसे आंदोलन की बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि शिक्षकों ने यह संदेश दिया है कि अपने अधिकारों और सेवा सुरक्षा की लड़ाई लड़ते हुए भी वे विद्यार्थियों की पढ़ाई और शिक्षा व्यवस्था के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।


मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षकों के आंदोलन को लेकर अक्सर यह आरोप लगाया जाता रहा है कि हड़ताल या आंदोलन के कारण स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होती है। लेकिन 22 अगस्त के कार्यक्रम ने यह साबित किया कि शिक्षक अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज बुलंद करते हुए भी विद्यालयीन कार्य और विद्यार्थियों की पढ़ाई को बाधित किए बिना आंदोलन कर सकते हैं।


प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आंदोलन को लेकर शिक्षकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। बस्तर और जशपुर सहित कई जिलों में शिक्षकों ने बड़ी संख्या में रैली निकालकर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। वहीं बेरला एवं बेमेतरा क्षेत्र में बाइक रैली के माध्यम से शिक्षकों ने अपनी मांगों को बुलंद आवाज दी। कई विकासखंडों में बारिश के बीच भी शिक्षक रैली में डटे रहे और खराब मौसम उनके उत्साह को कम नहीं कर सका।


रैली के दौरान शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता से प्रभावित शिक्षकों को सेवा सुरक्षा देने, वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति, वेतन विसंगति दूर करने तथा पूर्व सेवा की गणना सहित विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार नारे लगाए और शासन का ध्यान आकृष्ट कराया।


रविन्द्र राठौर का कहना है कि "लंबे समय से शिक्षक अपनी सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक भविष्य को लेकर चिंतित हैं। अब शिक्षक अपनी समस्याओं को लेकर मुखर होकर अपनी बात शासन के सामने रख रहे हैं। 22 अगस्त का आंदोलन इस बात का संकेत है कि शिक्षक अपनी जायज मांगों के समाधान के लिए संगठित होकर आगे की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।"


प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि "शिक्षकों का यह आंदोलन किसी व्यवस्था को बाधित करने के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था को न्यायपूर्ण बनाने और शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है। 146 विकासखंडों में एक साथ हुए कार्यक्रम ने प्रदेश में शिक्षक एकता और संगठनात्मक शक्ति का व्यापक प्रदर्शन किया है।"


विकास राजपूत ने शासन से मांग की है कि "शिक्षकों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए, ताकि प्रदेश के हजारों शिक्षकों और उनके परिवारों के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो सके।"


शिक्षक साझा मंच ने स्पष्ट किया कि सेवा सुरक्षा, वरिष्ठता और शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों के समाधान तक संघर्ष लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।


इस अवसर पर संगठन के हरीश गोपाल जिलाध्यक्ष, विवेक राठौर,आशीष सिंह कार्य.अध्यक्ष, दिलीप भारती गुरु कोषाध्यक्ष,सुरेश साहू, रामभरोस पटेल, सुरेश खुँटे, अजय पांडे, अश्विनी टेंगवर,सुशील कुमार अनंत गेंदराम कुर्रे,कोमल प्रसाद वैष्णव, प्रकाश कुमार साहू, हेमचरण , हुतेश्वर राजवाड़े, अजय पांडे,सुरेश कुमार साहू, सुरेश कुमार खुँटे,जीवराखन कर्ष, संतोष कुमार, खमेंलाल धीवर,रामेश्वर आदित्य, संगीता सोनी, पार्वती सिंह, जयप्रकाश कश्यप,रामस्वरूप साहू,अजय मधुकर,कृष्ण कुमार यादव,संजय चौहान ब्लॉक अध्यक्ष,दिनेश तिवारी जिला सचिव ,शशिकांत पांडे,प्रवीण सिंह, देवेंद्र तिवारी,अरविंद यादव,सहित जिला एवं ब्लॉक पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।

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