बिलासपुर। हाल ही में दो पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर के मामले को लेकर बिलासपुर के पत्रकारों में नाराजगी दिखाई दी। गुरुवार को जिले के विभिन्न पत्रकार संगठनों और मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकारों ने पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रामगोपाल गर्ग एवं कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने आरोप लगाया कि बिना निष्पक्ष जांच के पत्रकारों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है, जिससे पत्रकार समुदाय में असुरक्षा और भय का माहौल बन रहा है।
पत्रकारों ने मांग की कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लागू पत्रकार सुरक्षा कानून संबंधी प्रावधानों का जिले में प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित किया जाए तथा संबंधित प्रकरण की जांच पूरी होने तक किसी भी पत्रकार की गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए।
क्या है पूरा मामला..
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि कुछ दिनों पूर्व सिविल लाइन थाना के पुराने भवन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।वीडियो में थाना परिसर के एक कमरे में वर्दीधारी आरक्षक मनोज साहू जमीन पर सोते हुए दिखाई दे रहे थे, जबकि दूसरे कमरे में शराब और बीयर की बोतलें रखी नजर आ रही थीं। इस वीडियो को कई समाचार पोर्टलों और मीडिया संस्थानों ने प्रकाशित किया था। समाचारों में पुलिस प्रशासन का पक्ष भी प्रमुखता से शामिल किया गया था, जिसमें मामले की जांच कर कार्रवाई करने की बात कही गई थी।
इसके बाद सोशल मीडिया पर आरक्षक मनोज साहू और एक चाय दुकान संचालक के बीच कथित बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ। ऑडियो के आधार पर सिविल लाइन पुलिस ने आरक्षक रितेश मिश्रा, पत्रकार जिया खान, पत्रकार अनुज श्रीवास्तव तथा एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।
पत्रकारों का कहना है कि एफआईआर दर्ज करने से पहले संबंधित पत्रकारों का पक्ष नहीं लिया गया और न ही किसी स्वतंत्र जांच की जानकारी सार्वजनिक की गई। ऐसे में बिना प्रारंभिक जांच के सीधे एफआईआर दर्ज किया जाना निष्पक्ष प्रक्रिया के विपरीत प्रतीत होता है।पत्रकार सुरक्षा कानून के पालन की मांग..
ज्ञापन में कहा गया कि पत्रकारों से जुड़े मामलों में शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत पहले एक समिति द्वारा जांच की जानी चाहिए। पत्रकारों का दावा है कि इस प्रकरण में ऐसी प्रक्रिया का पालन किए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
पत्रकारों ने कहा कि यदि किसी पत्रकार पर कोई गंभीर आरोप है तो उसकी निष्पक्ष जांच अवश्य होनी चाहिए, लेकिन जांच से पहले आपराधिक प्रकरण दर्ज करने से स्वतंत्र पत्रकारिता प्रभावित होती है और पत्रकारों में भय का वातावरण बनता है।
मुलाकात के दौरान आईजी रामगोपाल गर्ग और कलेक्टर संजय अग्रवाल ने पत्रकारों की बात गंभीरता से सुनी। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि मामले में न्यायसंगत और निष्पक्ष प्रक्रिया का पालन किया जाएगा तथा किसी भी पत्रकार के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयावधि में उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो वे 15 जून से चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेंगे। आंदोलन के तहत धरना, प्रदर्शन, जनजागरण अभियान और अन्य शांतिपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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