माता कर्मा के नाम से साहू समाज के जनप्रतिनिधि हिंदी फिल्म भक्त मां कर्मा की फिल्म को क्यों नहीं देखने जाते।

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क्या फिल्म को बनाने वाले सतनामी समाज से है तो क्या फिल्म को क्यों नहीं देखना चाहते।

शालिनी राकेश न्यूज़ एजेंसी जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़ राज्य।

छत्तीसगढ़ राज्य में छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री में प्रसिद्ध हिंदी फिल्म भक्त मां कर्मा के जीवन पर आधारित फिल्म बन चुकी है और आज प्रदर्शित हो चुकी है हमारे साहू समाज के जितने भी जनप्रतिनिधि है जय कर्मा माता जय कर्मा माता कहकर राजनीति करते हैं और आज उसी की जीवन पर आधारित फिल्म बनी हुई है उसे फिल्म को देखने के लिए क्यों नहीं जा रहे हैं साहू समाज के लोग जबकि अन्य समाज के लोग उसे फिल्म को देखने के लिए जा रहे हैं फिल्म की तारीफ कर रहे हैं लेकिन हमारे साहू समाज के जन्म प्रतिनिधि उपमुख्यमंत्री सांसद विधायक जिला पंचायत सदस्य जनपद पंचायत सदस्य ग्राम पंचायत सदस्य साहू समाज से निर्वाचित प्रतिनिधि है जो कि इस फिल्म को देखने के लिए क्यों नहीं जा रहे हैं।


क्या एक छोटी जाति की रहने वाले निर्माता निर्देशक के द्वारा निर्माण की गई फिल्मों को इतना भेदभावपूर्ण क्यों किया जा रहा है जबकि निर्माता एवं निर्देशक छत्तीसगढ़ विधानसभा के विधानसभा अध्यक्ष सांसद बिलासपुर को उपमुख्यमंत्री को आमंत्रित किया गया था फिल्म को देखने के लिए उन्होंने आश्वासन दे रखा था कि हम फिल्म देखेंगे मगर आज फिल्म को रिलीज हुई तीन दिवस पूर्ण हो चुका है जनप्रतिनिधि इस फिल्म को देखने के लिए क्यों नहीं जा रहे हैं क्या साहू समाज की वोट पर राजनीति करने वाले जनप्रतिनिधि को क्या सुंदरानी वीडियो शब्द की फिल्म पसंद आती है की सतीश जैन के द्वारा निर्मित फिल्म पसंद आती है कि राज वर्मा द्वारा निर्मित फिल्म पसंद आती है क्या एक छोटी जाति की निर्माता एवं निर्देशक के द्वारा बनाई गई फिल्म माता कर्मा की जीवन पर आधारित फिल्म को इतना भेदभाव पूर्ण रूप से अनदेखा कर दिया जा रहा है ।


साहू समाज के जनप्रतिनिधि किसी भी कार्यक्रम में जाते हैं तो बोलते हैं कर्मा माता हमारी कुलदेवी है हमारी वह है उसके जीवन को अनुसरण करना चाहिए बोलते हैं मगर क्या एक भी बार यह सोचा है कि उसके जीवन पर आधारित जो फिल्म बनाई गई है उसे फिल्म को एक बार तो देखें उसके बाद में ही राजनीति करें अन्यथा राजनीति से संन्यास ले।


2025 में प्रदर्शित हुई थी फिल्म जय शीतला मैया इस फिल्म के भी निर्माता लिलेश्वर सिंन्हा उस फिल्म को भी देखने के लिए भीड़ नहीं गई आखिर ऐसा क्यों हो रहा है कि कोई सा भी धार्मिक फिल्म बन रहा है और उसे धार्मिक फिल्म को बनाने वाले एक छोटी जाति के हो या ना हो मगर इस तरह से फिल्मों को मतभेद नहीं करना चाहिए जनप्रतिनिधियों के द्वारा।


वहीं दूसरी तरफ यही हिंदी मूवी को अन्य समाज का प्रोड्यूसर डायरेक्टर बनता है और उसे प्रदर्शित करता है तो उसे फिल्म को देखने के लिए भीड़ लग जाती है सिनेमा घर में एवं मल्टीप्लेक्स में पीवीआर में 36 मॉल में।


छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री ने यह कहा था कि जितने भी धार्मिक फिल्म जितने भी महापुरुषों पर जीवन पर आधारित जो फिल्म बनाई जाएगी और उसे प्रदर्शित की जाएगी तो उसे फिल्मों को राज्य सरकार द्वारा टैक्स फ्री किया जाएगा ऐलान हो चुका है मगर ए जाने के उनके आदेश केवल तुगलक की फरमान है क्या।


ऐसे राजनेताओं को जो कि धर्म को राजनीति में लाते हैं और धर्म के आधार पर चुनाव जीत जाते हैं और आज वही पर किसी महापुरुष किसी देवी देवता के नाम पर फिल्म बन जाती है और उसे फिल्म को देखने के लिए निमंत्रण दिया जाता है तो आश्वासन देकर उसे फिल्म को देखने के लिए नहीं जाते ऐसा क्यों।


हमारे शालिनी राकेश न्यूज़ एजेंसी के पत्रकार फिल्म को जब देखे तो उन्हें काफी अच्छा लगा इसलिए अच्छा लगा कि कोई भी निर्माता निर्देशक यह सोचकर फिल्म बनाता है कि मेरी बनाई गई फिल्मों को सिनेमा प्रेमी देख कर जाए और फिल्म की तारीफ करें हमारे संवाददाता राकेश साहू है साहू समाज के एक अच्छे पत्रकार हैं जिन्होंने कर्मा माता के जीवन पर आधारित फिल्म भक्त मां कर्मा की फिल्म को देखने के बाद फिल्म की काफी प्रशंसा की और साहू समाज से अपील किया है कि इस फिल्म को देखने के लिए साहू समाज वाले देखें यह उन्होंने अपनी कथन में कहा है।


शालिनी राकेश न्यूज़ एजेंसी जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़ राज्य।

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