कोरबा, छत्तीसगढ़ | हसदेव ताप विद्युत परियोजना (HTPP) के झाबू ऐश डाइक के फूटने की ताजा घटना ने क्षेत्र में गंभीर पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य संकट खड़ा कर दिया है। राखड़ युक्त पानी के हसदेव नदी और दर्री बैराज तक पहुंचने से पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है।
यह दूसरी बार है जब इसी परियोजना से जुड़ा ऐश डाइक फूटा है। इससे पहले भी इसी प्रकार की घटना में हसदेव नदी का पानी प्रदूषित हुआ था, जिसके लिए परियोजना प्रबंधन पर लगभग 18 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया था। इसके बावजूद पुनः ऐसी घटना होना गंभीर लापरवाही और नियमों की अवहेलना को दर्शाता है।
INTUC के जिला अध्यक्ष शशांक दुबे ने कहा:
“यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि बार-बार हो रही आपराधिक लापरवाही है। पहले भी नदी प्रदूषित हुई और जुर्माना लगा, लेकिन उसके बाद भी सुधार नहीं हुआ। अब दोबारा ऐश डाइक फूटना यह साबित करता है कि प्रबंधन को न कानून का डर है, न जनता की चिंता। ऐसे में इस ऐश डाइक को तत्काल बंद किया जाना चाहिए।”
उन्होंने बताया कि इस संबंध में पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार को औपचारिक शिकायत भेजकर झाबू ऐश डाइक के संचालन को तुरंत बंद करने की मांग की गई है।
मुख्य मांगें:
- झाबू ऐश डाइक को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए
- घटना की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए
- हसदेव नदी व दर्री बैराज के जल की वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
- प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल की तत्काल व्यवस्था की जाए
- दोषी अधिकारियों व प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए
उन्होंने जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ शासन से भी तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
मीडिया संपर्क:
शशांक दुबे
जिला अध्यक्ष, INTUC
संजय कुमार पटेल
जिला सचिव, INTUC

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