कोरबा/ छत्तीसगढ़INTUC ने छत्तीसगढ़ स्थित NTPC के कोरबा संयंत्र में चल रहे गंभीर श्रम कानून उल्लंघनों पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, NTPC कोरबा में कार्यरत ठेका श्रमिकों को निर्धारित न्यूनतम वेतन से भी कम भुगतान किया जा रहा है, जबकि मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) द्वारा 01.04.2026 से संशोधित वेतन दरें लागू की जा चुकी हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि श्रमिकों को C एरिया के न्यूनतम वेतन तक नहीं दिए जा रहे हैं, जो कि कानून का स्पष्ट उल्लंघन है।
इसके अतिरिक्त, श्रमिकों से प्रतिदिन 8 घंटे से अधिक और सप्ताह में 48 घंटे से अधिक कार्य कराया जा रहा है, जबकि उन्हें ओवरटाइम का भुगतान (दोगुनी दर से) नहीं दिया जा रहा है। यह श्रमिकों के अधिकारों का खुला हनन है।
जब श्रमिकों ने अपने वैधानिक अधिकारों—न्यूनतम वेतन और उचित कार्य समय—की मांग की, तो उन्हें धमकाया और प्रताड़ित किया गया, जिसके चलते उन्हें पुलिस में शिकायत करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस मुद्दे को लेकर NTPC संयंत्र के बाहर श्रमिकों द्वारा प्रदर्शन भी किया गया, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
यह भी उल्लेखनीय है कि Contract Labour (Regulation and Abolition) Act, 1970 के अनुसार, यदि ठेकेदार न्यूनतम वेतन का भुगतान करने में विफल रहता है, तो Principal Employer (NTPC) की यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वह श्रमिकों को पूरा भुगतान सुनिश्चित करे। अतः NTPC इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
INTUC की प्रमुख मांगें:
- NTPC कोरबा में श्रम कानून उल्लंघनों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
- सभी श्रमिकों को B एरिया के अनुसार न्यूनतम वेतन दिया जाए
- पिछले 3 महीनों का बकाया वेतन ब्याज सहित भुगतान किया जाए
- ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से सुनिश्चित किया जाए
- सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे कार्य की सख्ती से पालन कराया जाए
- श्रमिकों को धमकाने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए
- Principal Employer के रूप में NTPC की जवाबदेही तय की जाए
संजय पटेल जिला सचिव कोरबा इंटक ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय तथा मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर श्रमिकों को न्याय दिलाने की मांग की है।
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह न केवल श्रमिकों के अधिकारों का हनन होगा, बल्कि कानून के शासन पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।

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