प्रेम चंद्राकर एवं भूपेंद्र साहू का जादू नहीं चल पाया की माया देदे मायारू भाग 2 का पर्दा उतर गया।

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मात्र ₹100 की टिकट से स्कूटी गाड़ी की लालच में फिल्म को कोई पब्लिसिटी नहीं मिल पाई।


छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री में 10 अप्रैल को प्रदर्शित हुई फिल्म माया देदे मयारू भाग 2 का जादू नहीं चला इसलिए नहीं चल पाया कि फिल्म के निर्माता निर्देशक इस फिल्म को देखने के लिए 24 से 30000 की गाड़ी को इनाम के लिए रखा और फिल्म को पब्लिक का रिस्पांस नहीं मिल पाया टॉकीज से सीधा पर्दा उतर गया यह कैसी जादू चला की प्रेम चंद्राकर और भूपेंद्र साहू की जोड़ी इस बार कमल नहीं कर दिखा पाई इसलिए नहीं दिखा पाई की कलाकारों की कलाकारी भी इतना ज्यादा खास नहीं थी जिसकी वजह से फिल्म सुपर फ्लॉप हो गई और जहां 50 से ऊपर टॉकीज में लगा हुआ था केवल प्रभात टॉकीज में ही चला और बाकी टॉकीज से पर्दा उतर गया क्यों उतरा करण को फिल्म के निर्माता एवं निर्देशक ही बता पाएंगे।


सबसे बड़ी बात तो यह है कि छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री में एक महीने में लगातार फिल्मों को प्रदर्शित किया जाता है जिसकी वजह से सिनेमा देखने वालों की संख्या में कमी हो जाती है पहले ऐसा था कि टॉकीज में भीड़ लगी रहती थी इसलिए लगी रहती थी कि ₹40 से लेकर ₹100 तक के टिकट रहता था मगर आज डेढ़ सौ रुपए से ₹300 तक का टिकट है जिसकी वजह से सिनेमा देखने वालों की संख्या में कमी होती जा रही है।


फिल्म माया देदे मयारू भाग 2 की कहानी का कोई सारांश नजर नहीं आया कहानी में इतनी मोड थी कि स्क्रिप्ट कहां से कहां जा रहा है इसका अता पता नहीं केवल गाना ही फिल्म को सुपरहिट के कगार पर पहुंचा है मगर कहानी में कोई गम नहीं है इसके चलते फिल्म मायायत दे दे मयारु भाग 2 का पर्दा उतर गया और जादू मंत्र नहीं चला।


जब फिल्म बनाई जाती है तो छत्तीसगढ़ी पारंपरिक वेशभूषा में होनी चाहिए ना की फुल पैंट ना की जींस ना की मिनी स्कर्ट साड़ी एवं धोती कुर्ता के हिसाब से फिल्म को बनाना चाहिए उसे परिधान में फिल्म काफी अच्छी लगती है दर्शकों को।


ऐसा लगता है कि फिल्म की कुल लागत भी वसूल नहीं कर पाई फिल्म के निर्माता निर्देशक।



आर एस न्यूज एजेंसी जांजगीर चांपा ।

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