कोरबा। राष्ट्रीय मजदूर कॉंग्रेस(INTUC) के जिला अध्यक्ष एवं जन शिकायतकर्ता शशांक दुबे द्वारा पताडी स्थित कोरबा पावर लिमिटेड (पूर्व में लैंको अमरकंटक पावर प्रा. लि.) के प्रस्तावित Phase-III 1600 MW विस्तार के विरुद्ध पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को प्रस्तुत शिकायत पर मंत्रालय के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट जारी की गई है।
दिनांक 28 अप्रैल 2026 को जारी 95 पृष्ठीय रिपोर्ट में मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय ने शिकायत में उठाए गए अनेक मुद्दों को गंभीर माना है तथा कई बिंदुओं पर परियोजना प्राधिकरण के विरुद्ध कार्रवाई एवं अनुपालन सुनिश्चित करने की अनुशंसा की है।
रिपोर्ट के अनुसार:
वर्ष 2007 तथा 2012-13 में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित विस्थापित परिवारों को रोजगार एवं पुनर्वास संबंधी दायित्व अब तक पूर्ण नहीं किए गए हैं।
मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि लंबित पुनर्वास एवं रोजगार दायित्वों के अनुपालन के बिना आगे के विस्तार की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
Draft EIA रिपोर्ट में SO₂, NOx एवं Mercury emission नियंत्रण तकनीक की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
अतिरिक्त भूमि आवश्यकता, पर्यावरणीय प्रभाव, जल उपयोग, राख (ash) प्रबंधन एवं सामाजिक प्रभावों को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए गए।
प्रस्तावित विस्तार से कोयला खपत 15.04 मिलियन MTPA तक बढ़ने, वायु प्रदूषण एवं स्वास्थ्य प्रभाव बढ़ने की आशंका जताई गई।
हसदेव नदी से भारी मात्रा में जल दोहन को लेकर भी गंभीर पर्यावरणीय चिंता दर्ज की गई।
मंत्रालय की रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि Draft EIA में 33% हरित क्षेत्र (greenbelt) के संबंध में कम क्षेत्र दर्शाया गया है।
जिला कलेक्टर, कोरबा के दिनांक 11.11.2022 के बाध्यकारी आदेश के अनुपालन नहीं होने का मामला भी रिपोर्ट में दर्ज किया गया है।
शशांक दुबे ने कहा कि यह रिपोर्ट साबित करती है कि स्थानीय जनता एवं विस्थापित परिवारों की शिकायतें निराधार नहीं थीं, बल्कि मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों को स्वयं पर्यावरण मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय ने गंभीर माना है।
उन्होंने मांग की है कि:
1. पताढी Phase-III 1600 MW विस्तार प्रस्ताव को तत्काल निरस्त किया जाए।
2. विस्थापित परिवारों को रोजगार एवं पुनर्वास सुनिश्चित होने तक किसी भी प्रकार की पर्यावरणीय स्वीकृति न दी जाए।
3. Draft EIA रिपोर्ट में तथ्यों को छिपाने एवं अधूरी जानकारी प्रस्तुत करने की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
4. पर्यावरणीय एवं पुनर्वास संबंधी उल्लंघनों के लिए कंपनी प्रबंधन के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए।
5. हसदेव नदी एवं कोरबा क्षेत्र पर पड़ने वाले पर्यावरणीय प्रभावों का स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए।
शशांक दुबे ने कहा कि कोरबा पहले से ही देश के सबसे प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है और ऐसे में बिना पूर्ण अनुपालन के किसी भी नए विस्तार की अनुमति स्थानीय जनता के स्वास्थ्य, पर्यावरण और विस्थापित परिवारों के अधिकारों के साथ अन्याय होगा।
जारीकर्ता:
शशांक दुबे
जिला अध्यक्ष, INTUC, कोरबा
सदस्य, ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस
कोरबा, छत्तीसगढ़
संजय कुमार पटेल, जिला सचिव INTUC, कोरबा
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