नगर पंचायत नरियरा सहित,बनाहिल-तरौद मार्ग की उखड़ी डामर बनी जानलेवा; धूल के गुबार से राहगीरों और ग्रामीणों का जीना दूभर।
राकेश न्यूज़ एजेंसी | नरियरा/जांजगीर
नगर पंचायत नरियरा और आसपास के ग्रामीणों के लिए सफर अब किसी बुरे सपने से कम नहीं रह गया है। बिलासपुर-जांजगीर मार्ग पर एनएच 49, निर्माण के बाद वैकल्पिक सड़कों की जो दुर्गति हुई है, उसका सबसे बड़ा खामियाजा नरियरा, बनाहिल और तरौद क्षेत्र के लोग भुगत रहे हैं। करोड़ों की लागत से हुई मरम्मत महज एक साल में कागजी साबित हुई और अब आलम यह है कि सड़कों पर डामर का नामोनिशान तक नहीं बचा है।
मरम्मत के नाम पर ₹19 करोड़ की 'होली'
वर्ष 2021 में पामगढ़ से अकलतरा चौक तक एनएच-49 की पुरानी सड़क की मरम्मत के लिए करीब 19 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। दावों के मुताबिक यह सड़क सालों तक साथ देने वाली थी, लेकिन महज एक साल के भीतर ही यह फिर से जर्जर होने लगी। वर्तमान में नरियरा क्षेत्र से गुजरने वाले इस मार्ग के कई हिस्से पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं।
धूल के गुबार और स्वास्थ्य का खतरा बन कर रह गया।
नए फोरलेन चौक से बनाहिल-नरियरा तिराहे तक दिन-रात धूल उड़ रही है। भारी वाहनों के आवागमन से उड़ने वाली धूल के कारण:
सांस लेना हुआ मुश्किल: आसपास के घरों और दुकानों में धूल की मोटी परत जम रही है, जिससे लोग अस्थमा और एलर्जी जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
शून्य दृश्यता: धूल की वजह से सड़क पर सामने से आ रहे वाहन दिखाई नहीं देते, जिससे आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं।
दुर्घटनाओं का गढ़ बना तरौद और किरारी क्रशर मोड़
सड़क की बदहाली केवल धूल तक सीमित नहीं है। भारी मालवाहक वाहनों के दबाव ने सड़क को जानलेवा बना दिया है:
तरौद बस स्टैंड व चौराहा: यहाँ से तागा और चोरभट्टी जाने वाले मार्ग पर भारी भीड़ रहती है, लेकिन सड़क की हालत बदतर है।
किरारी क्रशर मोड़: क्रशरों से गिट्टी लेकर निकलने वाले भारी वाहनों ने यहाँ सड़क के बीचों-बीच गहरे गड्ढे कर दिए हैं। रात के अंधेरे में ये गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं।
जलभराव की समस्या: फोरलेन के पास पुरानी सड़क जहां नई सड़क से जुड़ती है, वहां उचित निकासी न होने से पानी भरा रहता है, जिससे कीचड़ और फिसलन की समस्या बनी हुई है।
एक्सीडेंट में विद्यार्थी को भी जान गवानी पड़ी,आंदोलन भी हुए,
"पांच साल से स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासन और विभाग को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन मिला।" — स्थानीय निवासी, खुशहाल, केवट,योगेश मरावी, आदि ने कहा।
बीते हादसों से भी नहीं लिया सबक
अखबार की पड़ताल में सामने आया कि इस जर्जर मार्ग ने कई परिवारों को गहरे जख्म दिए हैं:
केस 1: विगत 27 मार्च को खिसोरा निवासी बाइक सवारों को ईको कार ने टक्कर मार दी थी, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हुए थे। वजह सड़क की बदहाली और धूल थी।
केस 2: पिछले वर्ष तरौद के पास एक महिला ट्रक की चपेट में आ गई थी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई थी। इसके बावजूद सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।
निष्कर्ष: नरियरा क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही सड़क का सुदृढ़ीकरण नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
नरियरा में नियमों की धज्जियां उड़ा रहे भारी वाहन; जर्जर सड़कें और बढ़ता जा रहा हादसों का डर
जांजगीर-चांपा | 24 जनवरी 2026
नगर पंचायत नरियरा में प्रशासन के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए भारी वाहनों का प्रवेश धड़ल्ले से जारी है। एक ओर जहाँ मुख्य मार्गों पर 'नो एंट्री' के बोर्ड लगाकर भारी वाहनों के प्रवेश का समय निर्धारित किया गया है, वहीं दूसरी ओर इन नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। इसका परिणाम यह है कि क्षेत्र की सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं और स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया है।
प्रतिबंध के बावजूद सड़कों पर 'दौड़ रहे' काल।
नरियरा, बनाहिल और तरौद से होकर मुख्य मार्ग फोरलेन तक जाने वाली सड़कों की हालत अत्यंत दयनीय हो गई है। प्रशासन ने स्पष्ट रूप से सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध (नो एंट्री) लगा रखा है, लेकिन इसके बावजूद ट्रक, हाइवा और डंपर बेखौफ होकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
ओवरलोडिंग और गिरते मलबे से बढ़ा खतरा
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये वाहन न केवल प्रतिबंध का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि अत्यधिक ओवरलोडिंग भी कर रहे हैं। कई ट्रकों में ट्रॉली कवर नहीं होने के कारण चलते वाहन से पत्थर, गिट्टी और मलबा सड़क पर गिरता रहता है। इससे पीछे चलने वाले दुपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना की आशंका हर पल बनी रहती है।
ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त दबाव
सड़कों की जर्जर स्थिति के साथ-साथ भारी वाहनों के अत्यधिक दबाव के कारण ग्रामीण मार्गों और पुलों की संरचना पर भी बुरा असर पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों के छोटे पुल इतने भारी वजन के लिए नहीं बने हैं, जिससे भविष्य में किसी बड़े हादसे या पुल टूटने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रमुख बिंदु:प
नियम का उल्लंघन: सुबह 6:00 से रात 11:00 के बीच नो-एंट्री का पालन नहीं हो रहा।
सड़क की स्थिति: नरियरा-बनाहिल मार्ग पूरी तरह जर्जर और गड्ढों में तब्दील।
सुरक्षा का अभाव: बिना तिरपाल ढके चल रहे वाहनों से गिर रहे हैं पत्थर।
जनता की मांग: प्रशासन सख्त कार्रवाई करे और भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग या कड़ाई से समय सीमा लागू करे।
"प्रशासन को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। अगर समय रहते इन भारी वाहनों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो जर्जर सड़कें और ओवरलोडिंग किसी बड़ी जनहानि का कारण बन सकती हैं।
इस संबंध में अकलतरा में एसडीएम को ज्ञापन भी दिया जा चुका है मरम्मत हेतु मगर एसडीएम के ओर से किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं की जा रही है यह प्रशासन की उदासीनता का एक परिचय है हमारे रिपोर्टर द्वारा ज्ञापन दिया गया था मगर आज पर्यंत तक मरम्मत संबंधित कार्यवाही नहीं की जा रही है आवेदन में उल्लेखित था कि अगर मरम्मत नहीं किया जाता है तो किसी भी प्रकार की उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी गई थी।
राकेश न्यूज़ एजेंसी जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़।

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