उपस्थित कवियों ने अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को ऊंचाइयां दी
साहित्यिक संगोष्ठी साथ ही अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शिक्षिका प्रियंका श्रीवास्तव का संस्थान द्वारा किया सम्मान
संस्था के अध्यक्ष जगदीश पाठक की अध्यक्षता एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्रवण ऊर्मालिया के विष्ट आतिथ्य में यह आयोजन किया गया
मां वीणावादनी के के छाया चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन पुष्प अर्पित कर की गई नवांकुर सदस्य एवं व्यंग के कवि राजेश जैन ने
महिलाओं के सम्मान हेतु बहुत हुआ रावण का बध श्री राम आपके हाथों से ,इस बार दहन सीता कर ले रावण को अपने हाथों से की गई इसके बाद
सी एम तिवारी ने
जाति भेद का मिटाकर आओ होली त्यौहार मनाए
श्रीमती प्रियंका श्रीवास्तव के द्वारा राधे राधे बोलकर मेरे श्याम तेरी होना चाहती हूं
नारायण तिवारी ने स्वीकार कर लो नमन हे नमन शारदे
दीक्षा सेन ने अपने गीत जिंदगी के सफर में गुजर जाते है जो मकाम मधुरता बिखेरी
सतीश उपाध्याय ने शीतल चंदन कर रहा सूरज की भौहें के लिए पोटली पीर की
बिनोद तिवारी के द्वारा चला ले तीर तू तेरे तरकश में है करले चालाकियां तेरे जहन में है चलो घर नहीं महल बनाते है
बाजपेई में एक शायर हु एक शायर शायरी का में दीवाना
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रवण ऊर्मालिया ने
बंदिशों से भरा जीवन का सफर होता
गैर की छांव में जब अपना बसर होता
गीत लिखना भी ऐसे पत्थर के लिए कोरे कागज पर बस स्याही का जहर होता है
संजय ताम्रकार
कारवा बढ़ेगा संबोधन का ये छोटा नाविक बनकर बढ़ता रहूंगा आगे में
नरोत्तम शर्मा ने अपने मधुर गीत चेहरा क्या देखते हो दिल में उतर कर देखो न
और अंत में आभार धन्यवाद के साथ
जगदीश पाठक ने
धन के रूप हजार
बिखरी मांगे तो भीख
अफसर मांगे तो उपहार
साहित्यिक संगोष्ठी में मंच संचालन का पूर्व अध्यक संबोधन नरेन्द्र अरोरा ने किया
वरिष्ठ साहित्यकार श्रवण ऊर्मालिया , व्यंग्यकार जगदीश पाठक , पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र अरोरा सतीश उपाध्याय विनोद तिवारी ,नारायण तिवारी सी एम तिवारी राजेश जैन बुंदेली परमेश्वर उपकार ,प्रतीक्षा बाजपेई नरोत्तम शर्मा, संजय ताम्रकार अरविंद वैश्य मैं आज के कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रबुद्ध जनों का आभार व्यक्त किया

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