महासमुंद जिले में पुलिस की कार्रवाई के दौरान अवैध मिनरल ट्रेड का बड़ा खुलासा हुआ है। टोल नाका पर दो ट्रकों की जांच में स्पंज आयरन के अवैध परिवहन और चोरी का मामला सामने आया, जिसकी जांच में करीब 106 करोड़ रुपये के घोटाले के संकेत मिले हैं।
हाईवे पर ट्रकों से होती थी स्पंज आयरन की चोरी
जांच में सामने आया कि हाईवे पर चलने वाले ट्रकों से स्पंज आयरन की चोरी की जाती थी। इसके बाद चोरी किए गए मिनरल को अवैध रूप से भंडारित कर फर्जी बिलों के जरिए विभिन्न कंपनियों में खपाया जाता था।
फर्जी कंपनियां बनाकर किया जाता था खेल
मामले में खुलासा हुआ है कि 2 सेल कंपनियों के नाम पर फर्जी इनवॉइस तैयार किए जाते थे। खास बात यह है कि इन कंपनियों को मासिक वेतन पर काम करने वाले 3 कर्मचारियों के नाम पर बनाया गया था, जिनके जरिए करोड़ों का फर्जी लेनदेन किया जा रहा था।
रायगढ़ से रायपुर दिखाकर होती थी अवैध ट्रेडिंग
आरोपियों द्वारा रायगढ़ से रायपुर तक स्पंज आयरन के परिवहन के फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे। जबकि वास्तविकता में यह माल चोरी और अवैध भंडारण के माध्यम से कारोबार में शामिल किया जाता था।
106 करोड़ से ज्यादा का लेनदेन जांच के दायरे में
अब तक की जांच में करीब 106 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन के सबूत मिले हैं। पुलिस को हवाला के जरिए पैसों के ट्रांजैक्शन के भी संकेत मिले हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
तीन आरोपी गिरफ्तार, कई और जांच के घेरे में
इस मामले में पुलिस ने ट्रक ड्राइवर सोनूलाल मोंगरे, रामेश्वर मानिकपुरी और मुख्य आरोपी रंजीत सिंह को गिरफ्तार किया है। इसके बाद जांच में रायगढ़ की एक इस्पात कंपनी के संचालक तारक घोष की संलिप्तता सामने आने पर उसे भी गिरफ्तार किया गया है।
फर्जी बिल से खपाया जाता था चोरी का माल
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी विभिन्न कंपनियों से फर्जी बिल खरीदकर चोरी किए गए स्पंज आयरन को वैध दिखाने की कोशिश करते थे। इसके लिए हाईवे पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता था।
स्पेशल टीम गठित, बड़े खुलासे की उम्मीद
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीम गठित की है। संभावना है कि आने वाले दिनों में कई और कंपनियां और आरोपी इस घोटाले में शामिल पाए जा सकते हैं।
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