रिपोर्टर राकेश कुमार साहू।
जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़। हाय रे महंगाई कमर तोड़ गई जनता की कमर को तोड़कर शमशान घाट पहुंचा दिया महंगाई ने केंद्र सरकार के द्वारा जो बजट प्रस्तुत किया गया है उस बजट के अनुसार जिन जिन चीजों की महंगाई 1 अप्रैल से बढ़नी थी वह पदार्थ की कीमत अप्रैल के स्थान पर फरवरी महीने में ही बढ़ गई है जैसे की राजश्री गुटखा सिगरेट शराब नशीले पदार्थ की कीमत में 1 अप्रैल से बढ़ोतरी होनी चाहिए जिसकी महंगाई को फरवरी में ही निर्धारित कर चल रहे हैं व्यापारी लोग राजश्री गुटका जो की ₹5 में बिकता था उस गुटके की कीमत आज ₹10 ₹20 में बिकना चालू हो चुका है जबकि यह नियम विरुद्ध है जहां भी हम खरीद कर खाते हैं वहां पर हमको जानकारी मिलती है कि ₹5 में अब नहीं मिलेगा अब मिलेगा ₹20 में एक राजश्री का गुटका क्योंकि गुटकी का भाव बढ़ दिया बढ़ा दिया गया है शासन के द्वारा जबकि महंगाई की जो डर है महंगा करने वाली वस्तुओं की निर्धारित समय सीमा निर्धारित की गई है 1 अप्रैल से मगर बड़े-बड़े व्यापारियों के द्वारा गुटखा सिगरेट जैसे नशीले पदार्थ को जाम करने के पश्चात बोल रहे हैं की कीमत बढ़ गई जबकि कीमत 1 अप्रैल से प्रभावशील होनी है इस तरह से भारतीय जनता पार्टी की सरकार दोनों जगह चल रही है छत्तीसगढ़ में भी केंद्र में भी दोनों के द्वारा जनता के ऊपर महंगाई की वर्षा करते हुए कमर को तोड़ने में लगी है एवं श्मशान घाट पहुंचने में लगी है आज हमारे देश की स्थिति ऐसी है कि कहा जाता था कि अच्छे दिन आएंगे मगर अच्छे दिन के जगह खराब दिन आ गए हैं आज हमारे राज्य में भी हमारे केंद्र में भी यह कैसी विकट परिस्थिति आ गई की 2020-21 22 में कोरोना कल था मगर यह महा कोरोना कल घोषित होने वाला है महंगाई की वजह से आज आम जनता के ऊपर महंगाई की डंडी बरसाई जा रही है इस महंगाई के दौर में जनता परेशान है व्यापारी मालामाल है नेता मालामाल है क्योंकि नेताओं के पास व्यापारियों का कमीशन जाता है इसलिए नेताओं को फर्क नहीं पड़ता।
जितने भी खाद्य पदार्थ हैं सभी की भाव में बढ़ोतरी व्यापारियों के माध्यम से ही किया जा रहा है जबकि शासन का निर्देश रहता है जिस भी किसी वस्तुओं का भाव वृद्धि होता है वह बजट के अनुसार में रहता है बजट जब प्रस्तुत किया गया उसके बाद में बजट में निर्धारित किया गया की 1 अप्रैल से महंगाई दर इतनी रहेगी कि नहीं रहेगी किसके पीछे जीएसटी का कर लगेगा किसके पीछे जीएसटी का कर नहीं लगेगा यह शासन निर्धारित कर चुकी रहती है मगर शासन के विधि विरुद्ध व्यापारियों की महंगाई की डंडी चल रही है लगातार इस तरह स्थिति रहेगी तो केंद्र एवं राज्य में अल्प अवधि में चुनाव निर्धारित हो जाएगा ऐसा लगता है यह अच्छे दिन की परिणाम नहीं है यह खराब दिन की परिणाम है जो कि आज महंगाई की सीमा रेखा इतनी अधिक हो गई है की जनता को बिना खान के ही रहना पड़ जाएगा और बिना खान के कोई नहीं रह सकता आज खाद्य तेल की कीमत फली तेल की कीमत ₹200 किलो एवं ₹200 प्रति लीटर की भाव से जनता खरीद रही है जनता की श्रमिकों की मजदूरी दर यस का 10 बना हुआ है ₹300 रोजीडेढ़ सौ रुपए रोजी ₹100 रोजीके हिसाब से भुगतान मिलता है।
हमारे संवाददाता अपने इलाके की किसी एक दुकान में राजश्री का गुटका लिया तो उनको पता चला कि ₹5 में बिकने वाला राजश्री का गुटखा ₹10 एवं ₹20 में बिक रहा है यह जानकारी उनको प्राप्त हुई तो उन्हीं के द्वारा महंगाई की मार कमर तोड़कर श्मशान घाट पहुंचा दिया।


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