राजनांदगांव में तिमाही परीक्षा के बीच 250 छात्र पहुंचे सरकारी कार्यक्रम में, शिक्षा विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

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राजनांदगांव।
सरकारी स्कूलों में चल रही तिमाही परीक्षाओं के बीच राजनांदगांव में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा विभाग की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरवपथ स्थित पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्कूल के करीब 250 विद्यार्थियों को निर्धारित परीक्षा में शामिल कराने के बजाय मंगलवार को पद्म गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में आयोजित सेवा संकल्प अभियान और युवा खिलाड़ी संवाद कार्यक्रम में भेज दिया गया।बताया जा रहा है कि विद्यार्थियों को कार्यक्रम में भेजने से पहले स्कूल प्रबंधन की ओर से शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को लिखित सूचना नहीं दी गई। साथ ही परीक्षा स्थगित करने की अनुमति भी नहीं ली गई थी।

नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों की परीक्षा रह गई

मंगलवार सुबह कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी निर्धारित तिमाही परीक्षा देने के लिए स्कूल पहुंचे थे। इसी दौरान करीब 250 विद्यार्थियों को परीक्षा कक्ष में भेजने के बजाय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना कर दिया गया।ऑडिटोरियम में आयोजित युवा खिलाड़ी संवाद कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव भी मौजूद थे। विद्यार्थियों के कार्यक्रम में पहुंचने के कारण उनकी तय परीक्षा नहीं हो सकी।

राज्य की तय समय-सारणी के बावजूद परीक्षा नहीं हुई

तिमाही परीक्षा का कार्यक्रम राज्य स्तर पर निर्धारित किया गया है। वहीं विद्यार्थियों के लिए प्रश्नपत्र जिला स्तर पर तैयार किए गए हैं। ऐसे में निर्धारित तारीख पर परीक्षा नहीं होने से परीक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।परीक्षा की तैयारी करके स्कूल पहुंचे विद्यार्थियों को अचानक कार्यक्रम में भेजे जाने की जानकारी सामने आने के बाद अभिभावकों में भी नाराजगी बताई जा रही है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों को नहीं मिली परीक्षा रोकने की सूचना

मामले में सबसे बड़ा सवाल विभागीय समन्वय को लेकर उठ रहा है। विद्यार्थियों को परीक्षा से हटाकर किसी अन्य कार्यक्रम में भेजने की जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पहले से नहीं थी।यदि स्कूल स्तर पर परीक्षा स्थगित करने का फैसला लिया गया था तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को क्यों नहीं दी गई। इसी तरह विद्यार्थियों को सरकारी कार्यक्रम में भेजने से पहले विभागीय अनुमति ली गई थी या नहीं, यह भी जांच का विषय बन गया है।

DEO बोले, विभाग ने परीक्षा रोकने का कोई आदेश नहीं दिया

जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल ने स्पष्ट किया कि सेवा संकल्प अभियान के तहत शिक्षा विभाग को केवल भाषण और चित्रकला प्रतियोगिता से जुड़ी जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के लिए विद्यार्थियों की परीक्षा रोकने या उन्हें वहां भेजने के संबंध में विभाग की ओर से कोई निर्देश जारी नहीं किया गया था।DEO के अनुसार तिमाही परीक्षा निरस्त करने का आदेश भी शिक्षा विभाग ने नहीं दिया है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर त्रुटि बताया है। इससे अब स्कूल स्तर पर लिए गए फैसले और परीक्षा व्यवस्था में हुई चूक को लेकर आगे कार्रवाई की स्थिति पर नजर बनी हुई है।

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