जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के सिटोंगा गांव में नागपंचमी के अवसर पर लगने वाला नाग दरबार अपनी अनूठी परंपरा और लोक आस्था के लिए खास पहचान रखता है। खेतों के बीच स्थित छोटे से नागदेवता मंदिर में बांकी और श्री को नाग-नागिन के स्वरूप में पूजने की परंपरा है। इस आयोजन में शामिल होने के लिए आसपास के क्षेत्रों के साथ जिलेभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।स्थानीय लोगों के बीच इस मंदिर को लेकर गहरी आस्था है। मान्यता है कि नागपंचमी के दिन यहां पूजा के दौरान नागदेवता कुछ श्रद्धालुओं पर सवार होते हैं। इसके बाद उनसे जुड़ी धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है।
नागपंचमी पर सजता है सिटोंगा का अनोखा नाग दरबार, जहां बांकी-श्री की लोककथा से जुड़ी है दो नदियों की कहानी
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जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के सिटोंगा गांव में नागपंचमी के अवसर पर लगने वाला नाग दरबार अपनी अनूठी परंपरा और लोक आस्था के लिए खास पहचान रखता है। खेतों के बीच स्थित छोटे से नागदेवता मंदिर में बांकी और श्री को नाग-नागिन के स्वरूप में पूजने की परंपरा है। इस आयोजन में शामिल होने के लिए आसपास के क्षेत्रों के साथ जिलेभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।स्थानीय लोगों के बीच इस मंदिर को लेकर गहरी आस्था है। मान्यता है कि नागपंचमी के दिन यहां पूजा के दौरान नागदेवता कुछ श्रद्धालुओं पर सवार होते हैं। इसके बाद उनसे जुड़ी धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है।
जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के सिटोंगा गांव में नागपंचमी के अवसर पर लगने वाला नाग दरबार अपनी अनूठी परंपरा और लोक आस्था के लिए खास पहचान रखता है। खेतों के बीच स्थित छोटे से नागदेवता मंदिर में बांकी और श्री को नाग-नागिन के स्वरूप में पूजने की परंपरा है। इस आयोजन में शामिल होने के लिए आसपास के क्षेत्रों के साथ जिलेभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।स्थानीय लोगों के बीच इस मंदिर को लेकर गहरी आस्था है। मान्यता है कि नागपंचमी के दिन यहां पूजा के दौरान नागदेवता कुछ श्रद्धालुओं पर सवार होते हैं। इसके बाद उनसे जुड़ी धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है।
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