राजेश राठौर
दैनिक दर्पण न्यूज़
जांजगीर। सोशल मीडिया पर कुछ लाइक, व्यूज़ और फॉलोअर्स बटोरने की होड़ अब सामाजिक मर्यादाओं पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। जांजगीर निवासी होने का दावा करने वाले वीडियो क्रिएटर पूरेन्द्र कुमार कश्यप के सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि वे मनोरंजन के नाम पर अभद्र भाषा, अश्लील गाली-गलौज और विवादित टिप्पणियों वाले वीडियो बनाकर फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कर रहे हैं।
आलोचकों का कहना है कि उनकी अधिकांश वीडियो में वे गुड़ाखू का सेवन करते हुए नजर आते हैं। चूंकि, गुड़ाखू तंबाकूयुक्त उत्पाद है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है, इसलिए सार्वजनिक मंच पर उसका इस तरह प्रदर्शन युवाओं और किशोरों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
इतना ही नहीं, उनकी कई वीडियो में अश्लील और अभद्र शब्दों का खुलेआम इस्तेमाल सुनाई देता है। सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस प्रकार की भाषा सामान्य होती गई तो इसका सीधा असर नई पीढ़ी की भाषा, व्यवहार और सामाजिक संस्कृति पर पड़ सकता है।
कुछ समय पहले प्रयागराज के पंडा-पुजारियों को लेकर बनाए गए एक वीडियो पर भी उन्हें सोशल मीडिया में तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था। लोगों ने उस वीडियो की भाषा और टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
इसके बावजूद, आलोचकों का आरोप है कि उनकी वीडियो की शैली में कोई बदलाव नहीं आया और विवादित तथा अभद्र कंटेंट का सिलसिला जारी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए अश्लीलता, अभद्रता और विवाद ही नया फार्मूला बन गया है?
यदि ऐसा है तो यह केवल व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि समाज में डिजिटल संस्कृति के स्तर पर भी गंभीर चिंता का विषय है। अब आवश्यकता इस बात की है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अपने सामुदायिक मानकों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करें।
यदि किसी सामग्री में अश्लीलता, घृणास्पद या अपमानजनक भाषा अथवा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, कंटेंट क्रिएटर्स को भी यह समझना होगा कि लोकप्रियता क्षणिक हो सकती है, लेकिन समाज पर छोड़ा गया प्रभाव लंबे समय तक रहवायरल होने की सनक या समाज को बिगाड़ने की साजिश? कथित वीडियो क्रिएटर पूरेन्द्र कुमार कश्यप के अश्लील कंटेंट पर उठे गंभीर सवाल
जांजगीर। सोशल मीडिया पर कुछ लाइक, व्यूज़ और फॉलोअर्स बटोरने की होड़ अब सामाजिक मर्यादाओं पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। जांजगीर निवासी होने का दावा करने वाले वीडियो क्रिएटर पूरेन्द्र कुमार कश्यप के सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि वे मनोरंजन के नाम पर अभद्र भाषा, अश्लील गाली-गलौज और विवादित टिप्पणियों वाले वीडियो बनाकर फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कर रहे हैं।
आलोचकों का कहना है कि उनकी अधिकांश वीडियो में वे गुड़ाखू का सेवन करते हुए नजर आते हैं। चूंकि, गुड़ाखू तंबाकूयुक्त उत्पाद है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है, इसलिए सार्वजनिक मंच पर उसका इस तरह प्रदर्शन युवाओं और किशोरों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
इतना ही नहीं, उनकी कई वीडियो में अश्लील और अभद्र शब्दों का खुलेआम इस्तेमाल सुनाई देता है। सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस प्रकार की भाषा सामान्य होती गई तो इसका सीधा असर नई पीढ़ी की भाषा, व्यवहार और सामाजिक संस्कृति पर पड़ सकता है।
कुछ समय पहले प्रयागराज के पंडा-पुजारियों को लेकर बनाए गए एक वीडियो पर भी उन्हें सोशल मीडिया में तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था। लोगों ने उस वीडियो की भाषा और टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
इसके बावजूद, आलोचकों का आरोप है कि उनकी वीडियो की शैली में कोई बदलाव नहीं आया और विवादित तथा अभद्र कंटेंट का सिलसिला जारी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए अश्लीलता, अभद्रता और विवाद ही नया फार्मूला बन गया है?
यदि ऐसा है तो यह केवल व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि समाज में डिजिटल संस्कृति के स्तर पर भी गंभीर चिंता का विषय है। अब आवश्यकता इस बात की है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अपने सामुदायिक मानकों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करें।
यदि किसी सामग्री में अश्लीलता, घृणास्पद या अपमानजनक भाषा अथवा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, कंटेंट क्रिएटर्स को भी यह समझना होगा कि लोकप्रियता क्षणिक हो सकती है, लेकिन समाज पर छोड़ा गया प्रभाव लंबे समय तक रहता है।

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