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अंबिकापुर। सरगुजा संभाग के अंबिकापुर में पहाड़ियों की अवैध कटाई का गंभीर मामला सामने आया है। शहर से करीब सात किलोमीटर दूर मानिकप्रकाशपुर और क्रांति प्रकाशपुर क्षेत्र में पहाड़ों को जेसीबी मशीनों से काटकर मुरम और पत्थर निकाले जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ माफिया वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टा प्राप्त आदिवासी परिवारों को पहाड़ समतल करने का झांसा देकर प्राकृतिक संपदा का दोहन कर रहे हैं।
पट्टाधारकों को दिया जा रहा समतलीकरण का लालच
जानकारी के अनुसार, वन अधिकार अधिनियम के तहत आदिवासी परिवारों को पहाड़ी क्षेत्र का अधिकार पत्र मिला है। आरोप है कि माफिया इन परिवारों को यह कहकर बहला रहे हैं कि पहाड़ समतल होने के बाद मकान बनाना और खेती करना आसान होगा। इसी बहाने जेसीबी से पहाड़ काटकर बड़ी मात्रा में मुरम और पत्थर निकाले जा रहे हैं, जिन्हें शहर में बेचकर लाखों रुपये कमाए जा रहे हैं।
पर्यावरण और कानून दोनों पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गतिविधि न केवल पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है, बल्कि वन अधिकार अधिनियम की शर्तों का भी उल्लंघन है। इसके बावजूद वन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
अधिकार पत्र जारी करने की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि जिन पहाड़ियों पर लोगों का पूर्ण कब्जा तक नहीं था, वहां वन अधिकार अधिनियम के तहत अधिकार पत्र किस आधार पर जारी किए गए। वहीं, राजस्व विभाग और खनिज विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में खुलेआम पहाड़ों की कटाई हो रही है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से न तो निरीक्षण किया जा रहा है और न ही प्रशासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है।
पहाड़ बचाने की मांग कर रहे ग्रामीण
मानिकप्रकाशपुर क्षेत्र, जो दरिमा रोड से जुड़ा हुआ है और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के मार्ग पर स्थित है, प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से अवैध कटाई रोकने और पहाड़ियों को बचाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र का भी वही हाल होगा, जैसा महामाया पहाड़, नवागढ़ और बधियाचुआ जैसे इलाकों में अतिक्रमण और अवैध कब्जों के कारण हुआ था।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन और पहाड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाने के साथ दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका मानना है कि यदि अभी कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।
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