बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 34 वर्ष पुराने आपराधिक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने तीन डीएसपी स्तर के अधिकारियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने के लिए डीजीपी को नया शपथ पत्र प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता को पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट के खिलाफ अलग से कानूनी चुनौती देने की अनुमति भी प्रदान की है।यह आदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की गई है।
34 साल पुराने मामले में हाईकोर्ट सख्त: तीन DSP पर कार्रवाई का मांगा जवाब, DGP को शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 34 वर्ष पुराने आपराधिक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने तीन डीएसपी स्तर के अधिकारियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने के लिए डीजीपी को नया शपथ पत्र प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता को पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट के खिलाफ अलग से कानूनी चुनौती देने की अनुमति भी प्रदान की है।यह आदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की गई है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 34 वर्ष पुराने आपराधिक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने तीन डीएसपी स्तर के अधिकारियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने के लिए डीजीपी को नया शपथ पत्र प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता को पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट के खिलाफ अलग से कानूनी चुनौती देने की अनुमति भी प्रदान की है।यह आदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की गई है।
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