फिल्म: “भक्त माँ कर्मा” — आस्था का प्रतीत।।

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भक्त माता कर्मा की फिल्म की उल्टी गिनती चालू हो चुकी है और या फिर मैं 1

शालिनी राकेश न्यूज़ एजेंसी जांजगीर चांपा। 

मुंबई/बिलासपुर:  बहुप्रतीक्षित हिंदी फिल्म “भक्त माँ कर्मा” केवल एक धार्मिक कथा*प्रेस विज्ञप्ति*

फिल्म: “भक्त माँ कर्मा” — आस्था का प्रतीक

मुंबई/बिलासपुर:  बहुप्रतीक्षित हिंदी फिल्म “भक्त माँ कर्मा” केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और समानता का सशक्त संदेश लेकर आ रही है। लगभग 1000 वर्ष पुरानी इस कहानी में उस दौर को दर्शाया गया है, जब समाज में भेदभाव गहराई से व्याप्त था और कुछ वर्गों के लोगों को मंदिर में प्रवेश तक से वंचित रखा जाता था।

फिल्म की कथा में एक महत्वपूर्ण प्रसंग सामने आता है, जब राज्य के राजा का हाथी गंभीर रूप से बीमार पड़ जाता है। इस के लिए एक बहुत बड़े सूखे तालाब को तेल से भरकर हाथी को उसमें स्नान कराया जाता है। तभी राजा का हाथी स्वस्थ होता है। इस चुनौती इस परीक्षा से ही कर्मा की असली कहानी  शुरू होती है माँ कर्मा की अटूट आस्था, साहस और सामूहिक संघर्ष की प्रेरणादायक यात्रा। भगवान की कृपा और कर्मा सहित सभी तेलकारों की अथक मेहनत, विश्वास और एकजुटता के चलते वह असंभव कार्य भी संभव हो जाता है—सूखा तालाब तेल से भर जाता है। यह दृश्य न केवल चमत्कार का प्रतीक है, बल्कि यह दर्शाता है कि सच्ची श्रद्धा और एकता किसी भी अन्याय और भेदभाव को परास्त कर सकती है।

फिल्म की कहानी राजेश साहू द्वारा लिखी गई है, जबकि निर्माता अजय खांडेकर और राजकुमार यादव हैं। इस फिल्म का निर्देशन शशिकांत कौशिक ने किया है और गीत/संगीत डी पी विश्वकर्मा द्वारा दिया गया है।

फिल्म में स्वर दिए हैं आशा भोंसले, साधना सरगम, उदित नारायण, सुरेश वाडेकर, अल्का याज्ञनिक, कविता कृष्णमूर्ति, डी पी विश्वकर्मा और संतोषी साहू ने।

मुख्य कलाकारों में अनुकृति चौहान, गुलशन साहू, अजय सहाय, पुष्पेंद्र सिंह, विक्रम राज, हेमा शुक्ला, योगेश अग्रवाल, विनायक अग्रवाल, जितेंद्र राजा कौशिक, उपासना वैष्णव, ऊषा विश्वकर्मा, अजय शर्मा और नरेंद्र काबरा शामिल हैं।

“भक्त माँ कर्मा” एक ऐसी फिल्म है जो भक्ति के साथ-साथ सामाजिक समानता, न्याय और मानवता का संदेश देती है। यह दर्शकों को न केवल भावुक करेगी, बल्कि सोचने पर भी मजबूर करेगी। 

निर्देशक शशिकांत कौशिक का कहना है कि यह फिल्म हर आयु वर्ग के दर्शकों के लिए एक भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव साबित होगी। “भक्त माँ कर्मा” भारतीय परंपरा, संस्कृति और भक्ति को समर्पित एक सशक्त प्रस्तुति है। यह फिल्म उस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मान्यता पर आधारित है कि माँ कर्मा ने ही सबसे पहले भगवान जगन्नाथ जी को खिचड़ी का भोग लगाया था, और तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि पहले खिचड़ी का भोग और उसके बाद छप्पन भोग अर्पित किया जाता है।

फिल्म के निर्माता अजय खांडेकर और राजकुमार यादव ने बताया कि यह फिल्म जल्द ही देशभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और समानता का सशक्त संदेश लेकर आ रही है। लगभग 1000 वर्ष पुरानी इस कहानी में उस दौर को दर्शाया गया है, जब समाज में भेदभाव गहराई से व्याप्त था और कुछ वर्गों के लोगों को मंदिर में प्रवेश तक से वंचित रखा जाता था।

फिल्म की कथा में एक महत्वपूर्ण प्रसंग सामने आता है, जब राज्य के राजा का हाथी गंभीर रूप से बीमार पड़ जाता है। इस के लिए एक बहुत बड़े सूखे तालाब को तेल से भरकर हाथी को उसमें स्नान कराया जाता है। तभी राजा का हाथी स्वस्थ होता है। इस चुनौती इस परीक्षा से ही कर्मा की असली कहानी  शुरू होती है माँ कर्मा की अटूट आस्था, साहस और सामूहिक संघर्ष की प्रेरणादायक यात्रा। भगवान की कृपा और कर्मा सहित सभी तेलकारों की अथक मेहनत, विश्वास और एकजुटता के चलते वह असंभव कार्य भी संभव हो जाता है—सूखा तालाब तेल से भर जाता है। यह दृश्य न केवल चमत्कार का प्रतीक है, बल्कि यह दर्शाता है कि सच्ची श्रद्धा और एकता किसी भी अन्याय और भेदभाव को परास्त कर सकती है।

फिल्म की कहानी राजेश साहू द्वारा लिखी गई है, जबकि निर्माता अजय खांडेकर और राजकुमार यादव हैं। इस फिल्म का निर्देशन शशिकांत कौशिक ने किया है और गीत/संगीत डी पी विश्वकर्मा द्वारा दिया गया है।

फिल्म में स्वर दिए हैं आशा भोंसले, साधना सरगम, उदित नारायण, सुरेश वाडेकर, अल्का याज्ञनिक, कविता कृष्णमूर्ति, डी पी विश्वकर्मा और संतोषी साहू ने।

मुख्य कलाकारों में अनुकृति चौहान, गुलशन साहू, अजय सहाय, पुष्पेंद्र सिंह, विक्रम राज, हेमा शुक्ला, योगेश अग्रवाल, विनायक अग्रवाल, जितेंद्र राजा कौशिक, उपासना वैष्णव, ऊषा विश्वकर्मा, अजय शर्मा और नरेंद्र काबरा शामिल हैं।

“भक्त माँ कर्मा” एक ऐसी फिल्म है जो भक्ति के साथ-साथ सामाजिक समानता, न्याय और मानवता का संदेश देती है। यह दर्शकों को न केवल भावुक करेगी, बल्कि सोचने पर भी मजबूर करेगी। 

निर्देशक शशिकांत कौशिक का कहना है कि यह फिल्म हर आयु वर्ग के दर्शकों के लिए एक भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव साबित होगी। “भक्त माँ कर्मा” भारतीय परंपरा, संस्कृति और भक्ति को समर्पित एक सशक्त प्रस्तुति है। यह फिल्म उस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मान्यता पर आधारित है कि माँ कर्मा ने ही सबसे पहले भगवान जगन्नाथ जी को खिचड़ी का भोग लगाया था, और तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि पहले खिचड़ी का भोग और उसके बाद छप्पन भोग अर्पित किया जाता है।

फिल्म के निर्माता अजय खांडेकर और राजकुमार यादव ने बताया कि यह फिल्म जल्द ही देशभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।


इस फिल्म की खास बात यह है कि माता कर्मा साहू समाज की कुलदेवी है और भगवान जगन्नाथ जी को अर्थात श्री कृष्ण को खिचड़ी खिलाकर प्रसन्न किया है इसलिए यह धार्मिक फिल्म है और हिंदी भाषा पर आधारित फिल्म है यह फिल्म 15 मंई 2026 को प्रदर्शित होने वाली है।




शालिनी राकेश न्यूज़ एजेंसी जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़ राज्य।

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