CG News: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराने पर पीड़िता और उसके पूरे परिवार को गांव की पंचायत ने सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया. पीड़िता जब न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंची और एफआईआर दर्ज कराई, तो गांव के कुछ दबंगों ने पंचायत बुलाकर परिवार के खिलाफ कड़ा फैसला सुना दिया. इसके बाद पीड़िता और उसके परिवार को गांव के समाज से अलग कर दिया गया.
क्या है पूरा मामला?
मामला बसंतपुर थाना क्षेत्र के एक गांव का बताया जा रहा है. जानकारी के अनुसार गांव की एक महिला के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी. घटना के बाद जब महिला गर्भवती हुई तो उसने इस मामले की शिकायत पुलिस में करने का फैसला किया. जैसे ही पीड़िता और उसका परिवार आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे, उसी दौरान गांव में बैठक आयोजित कर ली गई, जिसमें कई प्रभावशाली लोग भी शामिल हुए.
पंचायत ने सुनाया सामाजिक दंड
इस बैठक में पंचायत के कुछ लोगों ने पूरे मामले का दोष पीड़िता और उसके परिवार पर ही मढ़ दिया. पंचायत ने पीड़िता को ही जिम्मेदार ठहराते हुए परिवार को सामाजिक दंड देने का फैसला सुनाया. पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि पंचायत में यह आदेश दिया गया कि परिवार को गांव के समाज से बाहर कर दिया जाए. इतना ही नहीं, परिवार से यह भी कहा गया कि वे पूरे गांव के लोगों के पैर धोकर उस पानी से स्नान करें और दंड के रूप में बकरा और शराब का भोज भी कराएं.
परिवार डरा-सहमा, प्रशासन से लगाई गुहार
पंचायत के इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार को गांव के धार्मिक कार्यक्रमों, सामाजिक आयोजनों और सामुदायिक गतिविधियों से दूर रहने के लिए कहा गया है. इस फैसले से परिवार बेहद परेशान और डरा हुआ है. अब पीड़िता और उसके परिजनों ने इस मामले की शिकायत अधिकारियों से करते हुए न्याय की मांग की है.
अधिकारियों ने कही जांच की बात
इस संबंध में वाड्रफनगर एसडीएम नीरनिधि नंदेहा ने बताया कि सामाजिक बहिष्कार की शिकायत प्रशासन तक पहुंची है और मामले की जानकारी एसडीओपी को भी दी गई है. उन्होंने कहा कि पुलिस दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत करेगी और पूरे मामले की जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी.
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