रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में अवैध अफीम की खेती का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला लैलूंगा थाना क्षेत्र के घटगांव का है, जहां गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अफीम की खेती का खुलासा किया है। मौके पर पहुंची टीम ने जांच शुरू कर दी है और पूरे मामले की तहकीकात की जा रही है।
बताया जा रहा है कि जिले में बीते दो दिनों के भीतर यह दूसरा और पिछले 17 दिनों में पांचवां मामला सामने आया है, जिससे प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है।
इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने X पर सरकार पर निशाना साधते हुए तंज कसा। उन्होंने कह—“अब तो ऐसा लग रहा है कि भाजपा को अपना चुनाव चिन्ह ‘कमल के फूल’ की जगह ‘अफीम का फूल’ कर लेना चाहिए। प्रदेश में जिस तरह से लगातार अफीम की खेती पकड़ाई जा रही है, वह तथाकथित ‘सुशासन’ की असल तस्वीर दिखा रही है।”
इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। एक ओर जहां विपक्ष सरकार को घेर रहा है, वहीं प्रशासन पर इन मामलों को रोकने का दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
इससे पहले तमनार ब्लॉक के आमाघाट क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर अफीम की खेती पकड़ी गई थी। जांच में सामने आया कि झारखंड निवासी मार्शल सांगा पिछले 10-12 सालों से इस इलाके में खेती कर रहा था। उसने स्थानीय किसान से जमीन लेकर पहले तरबूज और ककड़ी की आड़ में खेती शुरू की, लेकिन बाद में अफीम उगाना शुरू कर दिया। फिलहाल इस पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक हाल के दिनों में अलग-अलग जिलों में लगातार ऐसे मामले सामने आए हैं—
7 मार्च: दुर्ग के समोदा में बड़े पैमाने पर अफीम जब्त
10 मार्च: बलरामपुर के कुसमी में 3.67 एकड़ में खेती, 7 आरोपी गिरफ्तार
12 मार्च: कोरंधा में ढाई एकड़ में अफीम की फसल
20 मार्च: तमनार के आमाघाट में डेढ़ एकड़ में खेती
23 मार्च: रायगढ़ के लैलूंगा क्षेत्र में नया मामला उजागर
लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। आशंका जताई जा रही है कि प्रदेश में संगठित तरीके से अवैध अफीम की खेती का नेटवर्क सक्रिय है, जिसकी जड़ें दूसरे राज्यों से भी जुड़ी हो सकती हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


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