सरगुजा। जिस पार्क को हिरणों का सुरक्षित घर माना जाता था, उसी संजय गांधी वन जीव पार्क में देर रात एक भयावह नरसंहार हुआ। आवारा कुत्तों के झुंड ने पार्क में घुसकर 15 हिरणों और एक कोटरी (कोटर प्रजाति) को क्रूरता से मार डाला।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महज दो दिन पहले ही 14 हिरण इसी तरह कुत्तों के हमले में मारे गए थे। इसके बावजूद वन विभाग ने कोई अलर्ट जारी नहीं किया और सुरक्षा इंतजाम नहीं बढ़ाए। नतीजा, कल फिर 15 और एक कोटरी की जान चली गई।
वन विभाग के भारी-भरकम अमले की सैलरी हर महीने जमा होती है, लेकिन जंगली जानवरों की सुरक्षा के नाम पर केवल फाइलें घूम रही हैं। पार्क की कमजोर दीवारें आवारा कुत्तों को बार-बार प्रवेश का मौका दे रही हैं, और विभाग बेखबर बना हुआ है।
आम आदमी पार्टी के नेता ने आरोप लगाया कि वन विभाग साक्ष्य छुपाने की कोशिश कर रहा है और हो सकता है कि अधिकारियों या उनके करीबियों का इसमें हाथ हो। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जोर देकर कहा कि पूरी घटना की निष्पक्ष जांच हो और दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
मौके पर पहुंचे वन मंडल अधिकारी अभिषेक जोगवत ने बताया कि SDO की अध्यक्षता में जांच दल गठित किया गया है और लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। फिलहाल कोई विभागीय कार्रवाई, निलंबन या मेमो नहीं हुआ है।
अब सवाल उठता है—क्या संजय गांधी वन जीव पार्क वास्तव में हिरणों का संरक्षण केंद्र है या आवारा कुत्तों का शिकारगाह? और क्या वन विभाग जानवरों की सुरक्षा करता है या सिर्फ अपनी सैलरी और कुर्सी बचाने में लगा है?
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