छत्तीसगढ़ राज्य के राजधानी रायपुर में दीनदयाल ऑडिटोरियम में ठुमका का आयोजन ...

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रिपोर्टर राकेश कुमार साहू जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़ राज्य।

इस कार्यक्रम में बाल कलाकार वर्षा सिंन्हा के द्वारा प्रस्तुति दिया गया।


    रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोकनृत्य परंपरा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने के उद्देश्य से 4 जनवरी 2026 को राजधानी रायपुर स्थित दीनदयाल ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ी ठुमका के ऑडिशन का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 100 से भी अधिक प्रतिभाशाली नृत्य कलाकारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी कला का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
सुबह से ही दीनदयाल ऑडिटोरियम में कलाकारों की चहल-पहल देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति की झलक प्रस्तुत की। ऑडिशन के दौरान छत्तीसगढ़ी ठुमका की पारंपरिक लय, भाव-भंगिमा और लोकजीवन से जुड़े भावों को कलाकारों ने बेहद खूबसूरती से मंच पर उतारा। ढोलक, मांदर और पारंपरिक लोकगीतों की धुनों पर थिरकते कलाकारों ने दर्शकों और निर्णायक मंडल को मंत्रमुग्ध कर दिया।
आयोजन समिति के अनुसार इस ऑडिशन का उद्देश्य छत्तीसगढ़ी ठुमका जैसी समृद्ध लोकनृत्य शैली को प्रोत्साहित करना और नए उभरते कलाकारों को एक सशक्त मंच प्रदान करना है। चयनित प्रतिभागियों को आगे होने वाले बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों, स्टेज शो और संभावित टेलीविजन एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुति देने का अवसर मिलेगा।
ऑडिशन के लिए गठित निर्णायक मंडल में अनुभवी लोकनृत्य गुरुओं, सांस्कृतिक विशेषज्ञों और वरिष्ठ कलाकारों को शामिल किया गया था। निर्णायकों ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन नृत्य की शुद्धता, तालमेल, भाव-प्रस्तुति, मंच आत्मविश्वास और पारंपरिकता के आधार पर किया। निर्णायक मंडल ने कलाकारों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता है तो केवल उन्हें सही दिशा और मंच देने की।
इस अवसर पर कई युवा कलाकारों ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से उन्हें अपनी कला को निखारने और पहचान बनाने का अवसर मिलता है। ग्रामीण क्षेत्रों से आए कलाकारों में विशेष उत्साह देखने को मिला, जिन्होंने पहली बार राजधानी के इतने बड़े मंच पर प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया और चयन प्रक्रिया के परिणाम शीघ्र घोषित करने की जानकारी दी। दीनदयाल ऑडिटोरियम में आयोजित यह ऑडिशन छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि छत्तीसगढ़ी ठुमका आज भी युवाओं के दिलों में जीवित है और आने वाले समय में यह लोकनृत्य नई ऊँचाइयों को छुएगा।


इस तरह का आयोजन रायपुर में प्रतिवर्ष किया जाता है इसके माध्यम से छोटे कलाकार से बड़े कलाकारों की भी प्रस्तुति की जाती है और जिसकी अच्छी परफॉर्मेंस रहती है उसे सम्मानित भी किया जाता है।

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