बदल गई आपकी पसंदीदा ट्रेन की पहचान! रायपुर–जबलपुर एक्सप्रेस का नया नाम 'मूक माटी एक्सप्रेस', रेल यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट

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 Raipur-Jabalpur Express: रायपुर–जबलपुर एक्सप्रेस ट्रेन का नाम बदलकर अब ‘मूक माटी एक्सप्रेस’ कर दिया गया है. रेलवे का यह फैसला राष्ट्रसंत 108 आचार्य विद्यासागर महाराज को श्रद्धांजलि देने और उनके महान विचारों को समाज में स्थायी रूप से स्थापित करने के उद्देश्य से लिया गया है. इस पहल के जरिए उनकी अहिंसा, सादगी और तपस्या से जुड़े संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है.


ट्रेन के नाम बदलने के पीछे क्या है वजह?

इस ट्रेन के नाम परिवर्तन के पीछे राज्यसभा सांसद नवीन जैन की अहम भूमिका मानी जा रही है. उन्होंने 1 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा था. ज्ञापन में रायपुर–जबलपुर एक्सप्रेस का नाम आचार्य विद्यासागर महाराज की चर्चित कृति ‘मूक माटी’ के नाम पर रखने का अनुरोध किया गया था. यह मांग केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं थी, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों से जैन समाज और आचार्य विद्यासागर महाराज के अनुयायियों द्वारा लंबे समय से उठाई जा रही थी.


रायपुर–जबलपुर एक्सप्रेस का नया नाम क्या है ?

इन सभी मांगों को गंभीरता से लेते हुए रेल मंत्रालय ने 7 जनवरी 2026 को इस संबंध में आधिकारिक निर्देश जारी किए. जारी आदेश के अनुसार, अब रायपुर–जबलपुर एक्सप्रेस का नाम बदलकर औपचारिक रूप से ‘मूकमाटी एक्सप्रेस’ कर दिया गया है.


कौन थे आचार्य  विद्यासागर  महाराज?

आचार्य विद्यासागर महाराज जैन समाज के एक महान संत होने के साथ-साथ प्रख्यात दार्शनिक, साहित्यकार और गहरे आध्यात्मिक विचारक भी थे. उन्होंने अपने पूरे जीवन में अहिंसा, संयम, त्याग और आत्मिक शुद्धता जैसे मूल्यों को अपनाने और फैलाने का संदेश दिया. उनकी प्रसिद्ध कृति ‘मूक माटी’ भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण रचना मानी जाती है, जिसमें मौन, करुणा और मानवीय संवेदनाओं का अत्यंत प्रभावशाली और गहन चिंतन देखने को मिलता है. आचार्य विद्यासागर महाराज केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए नैतिकता और जीवन मूल्यों की प्रेरणा बने रहे.


क्या CPRO की ओर से कन्फर्म कर दिया गया ?

ट्रेन का नाम मूकमाटी एक्सप्रेस रखा जाना आचार्य विद्यासागर महाराज के विचारों और संदेशों को आम लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें स्थायी सम्मान देने की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है. हालांकि फिलहाल इस फैसले को लेकर CPRO की ओर से कन्फर्म नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जल्द ही रेलवे बोर्ड इस संबंध में औपचारिक घोषणा कर सकता है.


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