प्रणव झा द्वारा निर्देशित छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘धनेश के आराधना’ अपने शीर्षक को पूरी तरह सार्थक करती है। यह एक सरल, दिल को छू लेने वाली प्रेम कहानी है, जिसमें मासूमियत, हास्य और सामाजिक संदेश का सुंदर संतुलन देखने को मिलता है।
कहानी
फिल्म की कहानी एक स्कूल छात्रा आराधना और उसी स्कूल के बस ड्राइवर धनेश के इर्द-गिर्द घूमती है। धनेश पहली ही नजर में आराधना को दिल दे बैठता है, वहीं आराधना धनेश की सादगी और सच्चाई से प्रभावित होकर उसे चाहने लगती है।
फिल्म की खास बात यह है कि धनेश अपनी भावनाओं पर संयम रखते हुए यह निर्णय लेता है कि वह आराधना को 18 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद ही प्रपोज करेगा। फिल्म बार-बार इस संदेश को रेखांकित करती है कि 18 साल से पहले प्रेम में संयम जरूरी है, ताकि नैतिक और कानूनी परिपक्वता आ सके।
सहायक किरदार
कहानी में कलेक्टर काका, उनका ड्राइवर सेवक और धनेश से एकतरफा प्रेम करने वाली नशे की आदी पूनम जैसे किरदार हास्य और भावनात्मक गहराई जोड़ते हैं। ये पात्र फिल्म को हल्का-फुल्का और मनोरंजक बनाए रखते हैं।
निर्देशन और पटकथा
प्रणव झा का निर्देशन संतुलित और प्रभावशाली है। स्क्रीनप्ले चुस्त-दुरुस्त है, जिससे फिल्म की गति बनी रहती है। संवाद सीधे दिल से जुड़ते हैं, खासकर कॉमेडी वाले पंच।
कलेक्टर काका का संवाद —
“अतेक बड़ कलेक्टर होए के बाद घर के डौकी मन चमका देथे”
दर्शकों को खूब हंसाता है और तालियाँ बटोरता है।
गीत-संगीत और तकनीकी पक्ष
विष्णु कोठारी के लिखे रोमांटिक गीत फिल्म की जान हैं। श्याम हाजरा, तरुण गढ़पाले और स्वयं प्रणव झा का संगीत कहानी के मूड में पूरी तरह घुल-मिल जाता है।
राज ठाकुर की सिनेमेटोग्राफी में सुंदर फ्रेमिंग और संतुलित लाइटिंग देखने को मिलती है। महज 19 वर्ष के एडिटर श्रेष्ठ वर्मा की कसी हुई एडिटिंग फिल्म को कहीं भी बोझिल नहीं होने देती। बैकग्राउंड म्यूजिक हर दृश्य के भाव के अनुरूप है।
अभिनय
फिल्म के कलाकारों को उनके यूट्यूब इमेज के करीब रखा गया है, जिससे अभिनय स्वाभाविक लगता है। धनेश साहू, काका और सेवक अपने कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को खूब हंसाते हैं।
सबसे बड़ा सरप्राइज हैं लीड एक्ट्रेस आराधना—उनकी मासूमियत, सुंदर अभिव्यक्ति और मधुर आवाज दर्शकों का दिल जीत लेती है। धनेश और आराधना की केमिस्ट्री स्क्रीन पर बेहद आकर्षक है।
कमियां
मसाला फिल्म होते हुए भी एक्शन सीक्वेंस का लगभग अभाव खलता है। एक गाने में आराधना का शादी का सपना देखना थोड़ा पुराना और आज के युवाओं की सोच से मेल नहीं खाता, खासकर जब वह एक कलेक्टर की बेटी हो। कुछ छोटे प्लॉट पॉइंट्स भी असंगत लगते हैं। कहानी बहुत सीधी है और किसी बड़े ट्विस्ट की कमी महसूस होती है।
क्यों देखें?
अगर आप धनेश साहू, काका, सेवक जैसे यूट्यूब स्टार्स के फैन हैं, तो यह फिल्म आपके लिए ही बनी है। देसी छत्तीसगढ़ी संवाद, साफ-सुथरा हास्य और पारिवारिक माहौल इसे हर उम्र के दर्शकों के लिए उपयुक्त बनाता है। धनेश–आराधना की जोड़ी और आराधना की स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म का बड़ा प्लस पॉइंट है।
‘धनेश के आराधना’ एक हल्की-फुल्की, मनोरंजक और छत्तीसगढ़ी संस्कृति से भरपूर फैमिली एंटरटेनर है। यूट्यूब स्टार्स के प्रशंसकों के लिए यह निश्चित रूप से मस्ट वॉच फिल्म है।

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