कवर्धा। कबीरधाम जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर वनांचल क्षेत्र के सोनवाही गांव की रहने वाली फूलबतिया बाई बैगा के लिए हर मानसून डर और असुरक्षा लेकर आता था। कच्ची मिट्टी की दीवारें, दरकती खपरैल की छत और टपकता बारिश का पानी—उनका घर कम और चिंता ज्यादा था। लेकिन अब यह डर बीते कल की बात हो चुकी है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना ने उनके वर्षों पुराने सपने को हकीकत में बदल दिया है।
कच्चे घर से पक्के सपनों तक: फूलबतिया बाई बैगा की बदली ज़िंदगी
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कवर्धा। कबीरधाम जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर वनांचल क्षेत्र के सोनवाही गांव की रहने वाली फूलबतिया बाई बैगा के लिए हर मानसून डर और असुरक्षा लेकर आता था। कच्ची मिट्टी की दीवारें, दरकती खपरैल की छत और टपकता बारिश का पानी—उनका घर कम और चिंता ज्यादा था। लेकिन अब यह डर बीते कल की बात हो चुकी है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना ने उनके वर्षों पुराने सपने को हकीकत में बदल दिया है।
कवर्धा। कबीरधाम जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर वनांचल क्षेत्र के सोनवाही गांव की रहने वाली फूलबतिया बाई बैगा के लिए हर मानसून डर और असुरक्षा लेकर आता था। कच्ची मिट्टी की दीवारें, दरकती खपरैल की छत और टपकता बारिश का पानी—उनका घर कम और चिंता ज्यादा था। लेकिन अब यह डर बीते कल की बात हो चुकी है। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना ने उनके वर्षों पुराने सपने को हकीकत में बदल दिया है।

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