“सरगुजा से बहुत बड़ी खबर…!
मंत्री और विधायक से सवाल पूछने वाली सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर आकांक्षा टोप्पो को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
हाँ… गिरफ्तार किया गया… और फिर मुचलके पर छोड़ दिया गया।
मामला सीतापुर का है।
एक शासकीय ज़मीन…
जहाँ सरकार आंगनबाड़ी भवन बनवा रही है।
लेकिन उसी ज़मीन पर सालों से एक गरीब परिवार रह रहा है।
परिवार का कहना है—
‘हमारे पास इसके अलावा कोई ज़मीन नहीं है,घर में चार-चार दिव्यांग लोग हैं,
अगर यही छीन लिया गया,
तो हम सड़क पर आ जाएंगे।’
इसी मुद्दे पर आकांक्षा टोप्पो ने 23 दिसंबर को वीडियो बनाया।
वीडियो वायरल हुआ…
और सत्ता को मिर्ची लग गई।
24 दिसंबर को सीतापुर थाने में एफआईआर दर्ज कर दी गई।
धारा लगाई गई— 353(2)।
आरोप— मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और विधायक रामकुमार टोप्पो पर आपत्तिजनक टिप्पणी का।
सवाल पूछना आपत्तिजनक हो गया?
गरीब की आवाज़ उठाना अपराध बन गया?
शिकायत किसने की?
भाजपा महिला मोर्चा की जिला पदाधिकारी ने पुलिस आई…
गिरफ्तारी हुई…और फिर चुपचाप मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
अब असली सवाल सुनिए—
क्या सोशल मीडिया पर बोलने का हक सिर्फ नेताओं के पास है?
क्या गरीब के लिए बोलने वाला हर शख्स अपराधी है?
क्या सरकार ज़मीन छीन सकती है…लेकिन सवाल नहीं सुनेगी?
एक तरफ परिवार इच्छामृत्यु की बात कर रहा है…
दूसरी तरफ सवाल उठाने वाली लड़की जेल पहुँच रही है।
यह सिर्फ आकांक्षा टोप्पो का मामला नहीं है।
यह आपकी… मेरी…
हम सबकी आवाज़ का मामला है।आज वो गिरफ्तार हुई है…
कल आपकी पोस्ट नंबर पर होगी।
अगर आप सवाल पूछने के हक में हैं तो इस वीडियो को शेयर कीजिए।क्योंकि चुप्पी ही सबसे बड़ा अपराध है।”



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