कोरबा। हसदेव नदी के तट पर स्थित शहर के प्राचीनतम शैक्षणिक संस्थान ज्योति उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (मिशन स्कूल) में आज शनिवार को हर्षोल्लास के साथ बाल मेले का आयोजन किया गया। विद्यालय परिसर पूरे दिन उत्साह, उमंग और रौनक से भरा रहा। मेले में विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध पारंपरिक संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के तहत छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक ईंधन लकड़ी चूल्हा जलाकर ताजे और स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजन तैयार किए। इनमें चीला, फररा, अइरी, बाटी, भजिया, फरा, देहाती चटनी समेत कई परंपरागत पकवान शामिल थे। बच्चों ने अपने-अपने समूह में मिलकर, शिक्षकों के मार्गदर्शन में और स्वयं के व्यय से आकर्षक स्टॉल लगाए। हर स्टॉल पर व्यंजनों की सुगंध और बच्चों की चहल-पहल ने मेले को खास बना दिया।
बाल मेले में बड़ी संख्या में अभिभावक, पूर्व विद्यार्थी और अन्य आगंतुक पहुंचे, जिन्होंने बच्चों को प्रोत्साहित किया और उनके प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम में बतौर अतिथि शाला प्रबंधक पी.बी. सोना, वार्ड क्रमांक 1 के पार्षद युगल केवट तथा वार्ड क्रमांक 2 के पार्षद ईश्वर पटेल भी उपस्थित रहे। अतिथियों ने बच्चों की रचनात्मकता और टीम वर्क की प्रशंसा की तथा भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को जारी रखने की बात कही।
मेले के दौरान विद्यार्थियों में उत्साह देखते ही बनता था। उन्होंने समूह में कार्य करना, जिम्मेदारी निभाना, आर्थिक प्रबंधन, व्यवहार कौशल और पारंपरिक व्यंजनों की विधियों को सीखने जैसे महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त किए। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में स्वावलंबन, सामूहिक सहभागिता और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना था, जिसे विद्यालय प्रशासन ने सफलतापूर्वक पूरा किया।
बाल मेले ने बच्चों को सीख और आनंद दोनों का अनुभव कराया। पूरे दिन वातावरण उत्सवमय रहा और मेले ने विद्यालय की शिक्षा के साथ सांस्कृतिक समृद्धि की परंपरा को एक नई ऊंचाई दी।

Post a Comment