राजेश राठौर
दैनिक दर्पण न्यूज़
**जांजगीर-चांपा।** चिटफंड कंपनी के नाम पर निवेशकों को भारी ब्याज और कम समय में रकम दोगुनी करने का लालच देकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले दो आरोपियों को न्यायालय ने कड़ी सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम) जयदीप गर्ग की अदालत ने आर.आर.के. पब्लिक बाजार प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की संचालक नूरजहां बेगम और कंपनी के CEO राजन रत्न कुजूर को दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोनों आरोपियों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदण्ड भी लगाया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने निवेशकों को प्रतिमाह 12.5 प्रतिशत ब्याज देने और कम समय में निवेश की रकम दोगुनी करने का प्रलोभन दिया था। इस झांसे में आकर दो निवेशकों ने कंपनी में कुल 23 लाख 50 हजार रुपये जमा किए थे। इनमें प्रार्थी डिकेश्वर प्रसाद साहू के 12 लाख 50 हजार रुपये और गरीबदास महंत के 11 लाख रुपये शामिल थे। निर्धारित समयावधि पूरी होने के बाद भी निवेशकों को उनकी रकम वापस नहीं मिली।
मामले में प्रार्थी डिकेश्वर प्रसाद साहू ने थाना बाराद्वार में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 296/24 के तहत धारा 420, 34 भादवि एवं छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम की धारा 10 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना की। जांच पूरी होने के बाद कंपनी की संचालक नूरजहां बेगम और CEO राजन रत्न कुजूर के विरुद्ध न्यायालय में चालान पेश किया गया।
**10 गवाह और 29 दस्तावेजी साक्ष्य बने फैसले का आधार**
प्रकरण की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 10 गवाहों के बयान कराए गए तथा 29 प्रकार के दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया।
**दो अलग-अलग धाराओं में सुनाई गई सजा**
न्यायालय ने दोनों आरोपियों को धारा 420/34 भादवि के तहत 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास और एक-एक लाख रुपये अर्थदण्ड से दंडित किया है। वहीं छत्तीसगढ़ के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम की धारा 10 के तहत 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और एक-एक लाख रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई गई है। अर्थदण्ड अदा नहीं करने पर दोनों धाराओं में अतिरिक्त कारावास भुगतने का आदेश भी दिया गया है।
इस फैसले को चिटफंड कंपनियों के नाम पर निवेशकों को ऊंचे ब्याज और रकम दोगुनी करने का लालच देकर ठगी करने वालों के खिलाफ न्यायालय की सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।


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