अधिग्रहित भूमि को अपना बताकर फर्जी दस्तावेज के सहारे लगा लिया जियो रिलायन्स का मोबाईल टावर, अब तक मोबाईल कंपनी से ले लिया है लाखों रुपये किराया ...

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कोरबा/ छत्तीसगढ़ अवैध रूप से धन कमाने की लालच में आपराधिक षड्यंत्र रचते हुए अधिग्रहित भूमि को अपना निजी भूमि बताकर फर्जी दस्तावेज के सहारे जियो मोबाईल टावर लगा लिया और लाखों रुपये का हेराफेरी कर डाला अब इसकी शिकायत कलेक्टर से किया गया है! 


क्या है पूरा मामला..... 


ग्राम दर्री के भूमि शासकीय मूल खसरा नंबर 139 रकबा 0.83 एकड़ था, जो वर्तमान में चार भागों में बटांकित हो चुका है। खसरा नंबर 139/1/क 0.0590 हे., 139/1/ख 0.0580 हे. और 139/3 0.0450 हे. की भूमि वर्ष 1978 में ही राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम NTPC कोरबा द्वारा अधिग्रहित की जा चुकी है, जिसका मुआवजा सुलेमान कुरैशी को दिया जा चुका है।वर्तमान बी-1 किश्तबंदी खतौनी और खसरा पांचसाला वर्ष 2023-2024 में यह भूमि स्पष्ट रूप से NTPC के नाम पर दर्ज है। खसरा नंबर 139/2 रकबा 0.174 हेक्टेयर भूमि हसदेव प्रोजेक्ट छ.ग. शासन जल संसाधन सिविल विभाग ‌द्वारा पूर्णतः अधिग्रहित की जा चुकी है, जो वर्तमान खसरा पांचसाला में पूर्ण रूप से शासकीय भूमि हसदेव प्रोजेक्ट के रूप में दर्ज है जबकि वर्तमान राजस्व दस्तावेज में सुलेमान कुरैशी की कोई भी निजी भूमि शेष नहीं बची है।


फिर भी सुलतान कुरैशी ने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के साथ साठगांठ कर फर्जी दस्तावेज के सहारे नगर पालिक निगम कोरबा से दिनांक 26.09.2005 पत्र क्र. 11/अ.नि.अनु./2005/1348 को खसरा नंबर 139/1 पर टावर लगाने की अनापत्ति प्राप्त की

जबकि, राजस्व विभाग के आधिकारिक सीमांकन पंचनामा दिनांक 25.08.2025 और तहसीलदार दर्री के जांच प्रतिवेदन दिनांक08.10.2025/04.11.2025 में यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हो चुका है कि रिलायंस टेलीकॉम का 40 मीटर ऊँचा मोबाइल टावर वास्तव में खसरा नंबर 139/2 हसदेव प्रोजेक्ट/सिंचाई विभाग की अधिग्रहित भूमि पर अवैध रूप से स्थापित है।


सुलेमान कुरैशी और अन्य लोगों का नाम ग्राम दर्री के दर्शित खसरा नंबर के आनलाईन राजस्व दस्तावेज में त्रुटिवश दर्ज हो गया था जिसका नाजायज फायदा उठाते हुए सुलेमान कुरैशी ने अर्जित भूमि को अपना बताकर फर्जी तरीके से मोबाईल टावर लगा लिया इस पर पूर्व में शिकायत किया गया था और न्यायालय तहसीलदार कटघोरा रा.प्र.क्र. 5/अ-6(अ)/2010-11, आदेश दिनांक 10.09.2012 द्वारा स्पष्ट आदेश पारित कर सुलेमान कुरैशी और अन्य लोगों का नाम विलोपित करते हुए रिकॉर्ड दुरुस्त कर भूमि को राष्ट्रीय ताप विद्युत गृह के नाम पर दर्ज करने का अंतिम आदेश दिया जा चुका है।


अधिग्रहित भूमि को अपना बताकर अवैध रूप से कब्जा में रखना और अवैध रूप से मोबाईल टावर लगवाना तथा शासकीय संपत्ति को अपना बताकर बेजा आर्थिक लाभ लेना कहीं न कहीं अपराध के श्रेणी में आता है! 



शिकायतकर्ता की है प्रमुख मांग... 



शिकायतकर्ता की माने तो नगर निगम द्वारा जारी NOC की शर्त क्रमांक 4 और 6 के अनुसार, जिला नप्रशासन या किसी सक्षम प्राधिकारी की वैधानिक आपत्ति पर यह अनुमति तत्काल प्रभाव से स्वतः निरस्त मानी जाएगी तथा टावर हटाना बाध्यकारी होगा।

अधिग्रहित भूमि पर अवैध कब्जा कर शासन को लाखों रुपये की राजस्व क्षति पहुँचाने और धोखाधड़ी करने के अपराध में सुलेमान कुरैशी के विरुद्ध तत्काल अपराध पंजीबद दर्ज कर आपराधिक प्रकरण शुरू किया जाए।


हसदेव प्रोजेक्ट भूमि पर अवैध रूप से स्थापित मोबाइल टावर को तत्काल ध्वस्त जब्त करने की कार्रवाई की जाए।


सुलेमान कुरैशी द्वारा वर्ष 2005 से आज दिनांक तक रिलायंस टेलीकॉम से प्राप्त किए गए समस्त अवैध किराए की राशि को भू-राजस्व की बकाया राशि की तरह कुड़की कर राजसात किया जाए।

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