कोरबा में बेशकीमती लकड़ियों का खेल! सात पेड़ों से शुरू हुई जांच, अब 9 लाख की लकड़ी बरामद... क्या यह सिर्फ चोरी या बड़ा नेटवर्क?

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कोरबा ACGN: सीएसईबी की पुरानी कॉलोनियों में चल रही वृक्ष कटाई के बीच सामने आया इमारती लकड़ी चोरी का मामला अब एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता दिखाई दे रहा है। शुरुआती तौर पर सात पेड़ों की लकड़ी चोरी की रिपोर्ट दर्ज हुई थी, लेकिन पुलिस और वन विभाग की संयुक्त जांच आगे बढ़ी तो मामला कहीं अधिक गंभीर नजर आने लगा।

वन परिक्षेत्र अधिकारी विक्रांता सिंह कंवर ने थाना सिविल लाइन में रिपोर्ट दर्ज कराई कि सीएसईबी रामपुर स्थित जूनियर क्लब के पास राजस्व क्षेत्र में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अनुमति से कुल 207 वृक्षों की कटाई का कार्य चल रहा था। इनमें से सात वृक्षों की कटाई 29 जून 2026 को की गई थी, जबकि शेष वृक्षों की कटाई का कार्य ठेका व्यवस्था के तहत कराया जा रहा था।

दिनांक 14 जुलाई 2026 को शाम लगभग 4:35 बजे कार्यपालन अभियंता तारामणी तिग्गा ने सूचना दी कि एक वाहन में कटे हुए सात वृक्षों के लट्ठे लोड किए जा रहे हैं। सूचना मिलने पर अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक वाहन जा चुका था। पूछताछ में ठेकेदार सुनील कुमार गुप्ता ने लकड़ी को अपने वाहन से अभनपुर भेजे जाने की बात स्वीकार की। इसके बाद वन विभाग ने लगभग 2 लाख रुपये मूल्य की लकड़ी चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई।

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले एवं नगर पुलिस अधीक्षक प्रतीक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में थाना सिविल लाइन प्रभारी प्रशिक्षु डीएसपी आस्था शर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम में एएसआई चंद्रपाल खंडे सहित अन्य पुलिसकर्मियों को शामिल कर तत्काल विवेचना शुरू की गई।

जांच के दौरान यह पता चला कि लकड़ी को कोरबा से काफी दूर रायपुर-अभनपुर क्षेत्र तक पहुंचा दिया गया है। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और अन्य जानकारियों के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी सुनील कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया। थाना सिविल लाइन में अपराध क्रमांक 673/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2), 316(5) एवं 317(2) में मामला दर्ज कर आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

लेकिन यहीं से इस पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया।

प्रदेश स्तर पर गठित जांच दल की कार्रवाई में लगभग 20.169 घन मीटर इमारती लकड़ी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 9 लाख रुपये बताई जा रही है, तथा एक क्रेन बरामद की गई। अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि जब प्रारंभिक रिपोर्ट सात पेड़ों और दो लाख रुपये की लकड़ी की थी, तो नौ लाख रुपये की लकड़ी आखिर कहां से आई?

इसी बीच सीएसईबी की अन्य कॉलोनियों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। वर्तमान में कोरबा पश्चिम सहित कई स्थानों पर पुराने आवासों को तोड़ने के साथ-साथ साल, सरई और अन्य बेशकीमती वृक्षों की कटाई वन विभाग की अनुमति से की जा रही है। ऐसे में यह मांग उठने लगी है कि वहां से निकली लकड़ी का भी पूरा भौतिक सत्यापन और लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कोरबा पश्चिम स्थित सीएसईबी आवासीय परिसर से कुछ लकड़ियां अत्यंत कम कीमत, लगभग 5 रुपये प्रति किलो की दर से आम लोगों को दिए जाने की चर्चाएं भी हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इनकी सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

अब इस पूरे मामले में कई महत्वपूर्ण सवाल जांच के केंद्र में हैं—

सात पेड़ों की लकड़ी का मामला नौ लाख रुपये की बरामदगी तक कैसे पहुंचा?

कोरबा से लगभग 250 किलोमीटर दूर लकड़ी किसके संरक्षण में पहुंची?

क्या इस पूरे मामले में केवल एक व्यक्ति की भूमिका है या कोई बड़ा गिरोह सक्रिय था?

सीएसईबी की अन्य कॉलोनियों से निकली बेशकीमती लकड़ियों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित है या नहीं?

क्या अन्य स्थानों पर भी इसी तरह की अनियमितताओं की जांच होगी?

फिलहाल पुलिस और संबंधित विभागों द्वारा मामले की विवेचना जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह केवल चोरी का मामला था या बेशकीमती इमारती लकड़ियों के अवैध कारोबार का एक बड़ा नेटवर्क।

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