मैहर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत जरियारी में जल संकट अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। भीषण गर्मी के बीच गांव में पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने जनपद CEO अशोक तिवारी से समस्या बताकर राहत की मांग की, तो कथित तौर पर जवाब मिला—पानी नहीं आ रहा तो हम क्या करें, हम अपने तरीके से काम करेंगे।इस कथित बयान के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन आम जनता को पानी जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं करा सकता, तो फिर जिम्मेदार पदों का अर्थ क्या रह जाता है? ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एक तरफ प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने वाले कारोबारियों को पेड़ कटवाने और गहरी खदानें खोदने की खुली छूट दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर गांवों में जल संकट से जूझ रहे लोगों की सुनवाई तक नहीं हो रही।स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन पैसे वालों की चौखट पर सक्रिय दिखाई देता है, लेकिन आम जनता की प्यास और परेशानी को लेकर संवेदनहीन बना हुआ है। अब जरियारी के ग्रामीण सवाल पूछ रहे हैं—क्या मैहर प्रशासन की प्राथमिकता सिर्फ कारोबारियों की सुविधा है, या फिर जनता का जीवन भी कोई मायने रखता है?
जरियारी में पानी का संकट, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा — जनता प्यास से तड़पे और अफसर बेफिक्र?
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