रायगढ़/लैलूंगा/घरघोड़ा। भ्रष्टाचार के दीमकों ने रायगढ़ जिले की दो प्रमुख नगर पंचायतों - लैलूंगा और घरघोड़ा - की बुनियाद को किस कदर खोखला किया है, इसका कच्चा चिट्ठा अब जनता के बीच आने वाला है। एक के बाद एक हुए दो धमाकेदार RTI आवेदनों ने प्रशासनिक गलियारों में 'भूकंप' ला दिया है। 11 फरवरी 2025 से लेकर अब तक हुए करोड़ों के निर्माण और स्वच्छता कार्यों को सीधे कानून के शिकंजे में ले लिया गया है।
BNS-2023 का शिकंजा : 'झूठ बोला तो जेल तय' :इस बार की कार्रवाई सामान्य नहीं है। सूचना के अधिकार (RTI) के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS)-2023 की धारा 198 और 240 का ऐसा 'ब्रह्मास्त्र' चलाया गया है, जिसने अफसरों के पसीने छुड़ा दिए हैं। साफ चेतावनी दी गई है कि सूचना छिपाना या भ्रामक जानकारी देना अब केवल विभागीय लापरवाही नहीं, बल्कि 'आपराधिक कृत्य' माना जाएगा।
लैलूंगा से घरघोड़ा तक... एक ही 'पैटर्न' पर खेल? -दो अलग-अलग निकायों में लगाए गए इन आवेदनों ने विकास के दावों की हवा निकाल दी है। जांच के केंद्र में ये मुख्य बिंदु हैं :
* सफाई के नाम पर 'सफाई': स्वच्छता के मद में आई भारी-भरकम राशि कहां और कैसे खर्च हुई? क्या शहर वाकई साफ हुआ या सिर्फ खजाना साफ किया गया?
* सौंदर्यीकरण या बंदरबांट? शहर को चमकाने के नाम पर स्वीकृत बजट, तकनीकी स्वीकृति (TS) और प्रशासकीय स्वीकृति (AS) के कागजों की बारीकी से जांच होगी।
ठेकेदारों का 'मायाजाल' : वह कौन सा सिंडिकेट है जिसे बिना गुणवत्ता देखे करोड़ों का भुगतान कर दिया गया? मेजरमेंट बुक (MB) की प्रमाणित प्रतियां अब इस राज से पर्दा उठाएँगी।
रडार पर जिम्मेदार अधिकारी :लैलूंगा के जन सूचना अधिकारी (सब इंजीनियर) गौरव कुमार अग्रवाल और घरघोड़ा के सहायक ग्रेड-3 शम्भू दयाल पटनायक को 30 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है। धारा 5(5) और 6(3) के सख्त कानूनी प्रावधानों के तहत अब जिम्मेदारी से भागना नामुमकिन है।
खबर का 'तीखा' विश्लेषण :*रायगढ़ जिले के इन दो निकायों में पिछले एक साल के दौरान हुए कार्यों की 'क्वालिटी' पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। लेकिन पहली बार प्रमाणित दस्तावेजों के जरिए सीधे 'गुणवत्ता प्रमाण-पत्र' की मांग कर भ्रष्टाचार की जड़ पर प्रहार किया गया है। यदि दस्तावेजों में हेरफेर मिली, तो कई बड़े चेहरों का बेनकाब होना और जेल की सलाखों के पीछे जाना लगभग तय माना जा रहा है।
> "जनता के टैक्स के पैसे का हिसाब देना ही होगा। फाइलें दफन करने का दौर खत्म हो चुका है; अब हर ईंट और हर सफाई अभियान का हिसाब ऑन-रिकॉर्ड सार्वजनिक होगा।"

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