बिलासपुर से सामने आए चर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में न्यायालय ने वर्षों बाद अहम फैसला सुनाया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पुराने निर्णय को पलटते हुए मामले में नई दिशा तय कर दी है।
ट्रायल कोर्ट का फैसला बदला, उम्रकैद की सजा
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सीबीआई की अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के 2007 के फैसले को निरस्त कर दिया। अदालत ने अमित जोगी को हत्या और आपराधिक साजिश के अपराध में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त छह माह की सजा का प्रावधान रखा गया है।
कोर्ट ने उठाए अहम सवाल
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि एक ही तरह के साक्ष्यों के आधार पर कुछ आरोपियों को सजा देना और मुख्य आरोपी को बरी करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। अदालत ने इसे कानूनी दृष्टि से त्रुटिपूर्ण बताया और इसी आधार पर फैसले को पलट दिया।
2003 में हुई थी सनसनीखेज हत्या
यह मामला 4 जून 2003 का है, जब एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। बाद में दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए थे। ट्रायल कोर्ट ने 2007 में अधिकांश आरोपियों को सजा दी, लेकिन अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट से फिर खुला मामला
जग्गी के परिजनों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद मामले की पुनः सुनवाई का रास्ता खुला और हाईकोर्ट में विस्तृत सुनवाई हुई, जिसके बाद यह फैसला सामने आया।
राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल
इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति और कानूनी जगत में हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से चर्चाओं में रहे इस केस में आए इस निर्णय को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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