बिलासपुर : में राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व विधायक अमित जोगी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उन्हें दोषी मानते हुए तीन हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया।
अमित जोगी ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उच्च न्यायालय ने बिना सुनवाई का अवसर दिए CBI की अपील को केवल 40 मिनट में स्वीकार कर लिया। उन्होंने इसे गंभीर अन्याय करार देते हुए भरोसा जताया कि सर्वोच्च न्यायालय से उन्हें न्याय अवश्य मिलेगा। उन्होंने कहा कि वह शांति, आस्था और धैर्य के साथ न्याय की प्रक्रिया में आगे बढ़ रहे हैं और सत्य की जीत होगी।
2003 में हुई थी हत्या
4 जून 2003 को एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बने। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा सुनाई गई।
31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। इसके बाद राम अवतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिस पर अमित जोगी के पक्ष में स्टे लगा। बाद में मामला हाईकोर्ट में भेजा गया।
राम अवतार जग्गी कौन थे
कारोबारी पृष्ठभूमि वाले राम अवतार जग्गी पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी सहयोगी थे। जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए, तो जग्गी भी उनके साथ चले गए। विद्याचरण शुक्ल ने उन्हें NCP का छत्तीसगढ़ कोषाध्यक्ष बनाया था।
दोषियों की सूची
जग्गी हत्याकांड में दोषी पाए गए: अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत और विश्वनाथ राजभर।
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