छत्तीसगढ़ : हाई कोर्ट ने एक अहम मामले में सुनवाई करते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग और सिम्स प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता के लंबित अभ्यावेदन पर 30 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाए।
19 लाख से अधिक का भुगतान अटका
मामला मां भवानी एंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर सुरेंद्रनाथ बारिक की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ पाण्डेय ने अदालत को बताया कि वर्ष 2023 में निर्धारित शर्तों के अनुसार सामग्री की आपूर्ति की गई थी, जिसका संस्थान द्वारा उपयोग भी किया गया।
इसके बाद वर्ष 2024 में करीब 18,97,039 रुपये का बिल प्रस्तुत किया गया, लेकिन अब तक भुगतान नहीं किया गया है।
कई बार आवेदन, फिर भी कार्रवाई नहीं
याचिकाकर्ता ने 29 मई 2024 को अभ्यावेदन दिया और 7 जनवरी 2025 को स्मरण पत्र भी सौंपा, लेकिन इसके बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष ने भी याचिकाकर्ता की मांग का विरोध नहीं किया और कहा कि मामले में नियमों के तहत निर्णय लिया जाएगा। इस पर न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सामग्री की आपूर्ति हो चुकी है और बिल प्रस्तुत है, तो भुगतान में इतनी देरी उचित नहीं मानी जा सकती।
30 दिन में फैसला जरूरी
अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि पूरे मामले की समीक्षा कर 30 दिनों के भीतर निर्णय लें।
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