खाकी के 'खौफ' में न्याय का कत्ल: कोरबा पुलिस ने मदद मांगने आए युवक की हड्डी तोड़ी, वर्दी हुई शर्मसार!...

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​कोरबा। जिसे 'न्याय का मंदिर' कहा जाता है, वहां अब इंसाफ नहीं, बल्कि हड्डियां तोड़ी जा रही हैं। छत्तीसगढ़ के ऊर्जाधानी कोरबा से पुलिसिया बर्बरता की एक ऐसी रूह कंपा देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे पुलिस महकमे के माथे पर कलंक का टीका लगा दिया है। अपनी फरियाद लेकर थाने पहुंचे एक निहत्थे युवक को पुलिसवालों ने इस कदर पीटा कि वह अब अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और अपाहिज होने के डर के बीच झूल रहा है।


गुनाह सिर्फ इतना - पिता के लिए मांगा था इंसाफ : ​धनुवारपारा निवासी राजेश मतवानी का कसूर सिर्फ इतना था कि वह अपने पिता की 2022 में हुई सड़क दुर्घटना की फाइल पर धूल जमते नहीं देखना चाहता था। वह कोतवाली थाने यह पूछने गया था कि जांच कहां तक पहुंची? उसने सीसीटीवी फुटेज खंगालने की गुहार क्या लगाई, वर्दी के नशे में चूर 4-5 पुलिसकर्मियों ने उसे घेर लिया।


​"मदद की उम्मीद में गया युवक लहुलुहान होकर बाहर निकला। पुलिस ने लात-घूसों से राजेश की फीमर बोन (जांघ की हड्डी) के टुकड़े कर दिए। यह पिटाई नहीं, बल्कि वर्दी की हनक में किया गया सीधा हमला था।"


गरीब की बेबसी और पुलिस की 'गुंडागर्दी' : पीड़ित के चाचा श्रीचंद मतवानी ने एसपी को सौंपे शिकायती पत्र में साफ कहा है कि पुलिस पिछले काफी समय से उन्हें गुमराह कर रही थी। जब राजेश ने अपना हक मांगा, तो उसे 'सबक' सिखाने के नाम पर अपाहिज बना दिया गया। सवाल यह है कि क्या कोतवाली थाना अब टॉर्चर रूम में तब्दील हो चुका है? क्या आम आदमी के पास सवाल पूछने का अधिकार भी नहीं बचा?


सत्ता के गलियारों तक पहुंची गूंज : इस मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। पीड़ित पक्ष ने सीधे मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और आईजी से न्याय की गुहार लगाई है। हालांकि, कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने जांच टीम गठित करने और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन जनता के मन में सुलगता सवाल वही है:


* ​क्या खाकी अपने दागदार साथियों को बचाएगी या सच में न्याय होगा?

* ​एक गरीब युवक जो खुद इंसाफ मांगने गया था, उसे 'अपाहिज' करने की सजा क्या होगी?


अगर समय रहते इन 'वर्दीधारी भेड़ियों' पर नकेल नहीं कसी गई, तो 'जन-मित्र' पुलिस का नारा केवल कागजों और दीवारों तक ही सीमित रह जाएगा।

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