जिले का खनिज विभाग इन दिनों रेत माफियाओं पर शिकंजे कसने में जी-जान से जुटा हैं । आये दिन बल्कि प्रतिदिन खनिज विभाग, अकलतरा एसडीएम और अकलतरा पुलिस द्वारा अवैध रेत परिवहन पर लगातार कार्यवाही कर रेत माफियाओं और रेत परिवहन करने वाले वाहन मालिको को सकते में डाल दे रहे है । बताया जा रहा है कि इस महीने भर में केवल अकलतरा जिले में दस से बारह रेत से भरे चार पहिया वाहनों पर कार्यवाही हुई है और लगभग तीन महीनों में लगभग 25 गाड़ियो पर कार्रवाई हो चुकी है और अब भी दस से बारह रेत भरी गाडियां अकलतरा थाना में खड़ी है । लगातार हो रही इन कार्यवाहियों से रेत माफियाओं और दलालों में हड़कंप मचा हुआ है और रेत परिवहन करने वाले हाइवा और अन्य चार पहिया वाहन मालिक जुगाड लगाने में लगे हैं लेकिन उपर से आदेश के कारण नीचे वालों ने हाथ खड़े कर दिए हैं । ऐसा माना जा रहा है कि विधानसभा सत्र में हर साल अवैध रेत खनन का मुद्दे से विधानसभा का माहौल गर्म होता है और उसकी गर्मी रेत परिवहन करने वाले वाहन मालिको पर निकाली जाती है और वही समय फिलहाल जिले में चल रहा है कुछ अनुभवी लोगों का कहना है कि यह कवायद कुछ दिनों की है फिर वही ढर्रा शुरू होगा । कुछ सूत्रों का यह भी कहना है कि वर्तमान खनिज अधिकारी जिला का स्थानांतरण इसी कार्यवाही के कारण हो रहा था लेकिन जब रेत मुद्दे की भट्टी से रेत छिटक कर खादी के कुर्ते को ही छेदने लगी तो जिला खनिज अधिकारी को ताबड़तोड़ फायरिंग कर खादी के छिद्र को ढकने के लिए फिर रोक लिया गया है और लगातार कार्यवाही कर जिले की जनता को संदेश दिया जा रहा है कि रेत माफियाओं की खैर नहीं है ।
फिर भी पचासों गाड़ियों हो रही है पार
एक ओर खनिज विभाग रेत परिवहन करने वाले वाहन पर लगातार कार्यवाही कर जनता का विश्वास जीतने में लगी है तो दूसरी ओर प्रतिदिन तरौद चौक से पचासों गाड़ियां रेत भरी हुई पार होकर विभिन्न गांवों में जा रही है और खनिज विभाग इन अवैध रेत परिवहन पर कोई भी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है क्योंकि भले ही खनिज विभाग की कार्रवाई से हड़कंप जरूर मचा है लेकिन रेत माफिया पर रेत परिवहन पर अपनी लक्जरी लाइफ जीने वाले कोई न कोई रास्ता जरूर निकाल लेते हैं । अगर खनिज विभाग वाकई रेत परिवहन पर कार्रवाई करना चाहता है तो हर प्रमुख चौराहों पर खनिज चौकी बिठानी होगी लेकिन तकलीफ़ यह कि पहले से ही बनी खनिज चौकियों पर उल्लू नहीं बोल रहे हैं तो नयी बिठायी चौकियों पर क्या मुर्गा बांग देगा ।
बलौदा और पंतोरा रेत माफियाओं के मजे
एक ओर जिले के करीबी रेत खनन का सबसे करीब चांपा का हसदेव नदी रेत खनन का सबकी नजर में है और जो भी कार्यवाही हो , यही सबसे पहले होती है वहीं जिले का अंतिम छोर पर बसा केरा कछार जहां रेत माफियाओं का सबसे मुनासिब और सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है और कार्यवाही के नाम पर एक चिड़िया भी नहीं मरती है और रेत परिवहन के हौसले और तिजोरी दोनों बुलंद हैं कारण कि यह क्षेत्र जिले के अंतिम छोर में है और वहां जिला खनिज अधिकारी और एसडीएम के पहुंचने के पहले सारे साजो-सामान हटा लिये जाते हैं। कुछ सूत्रों का यह भी कहना है कि पंतोरा चौकी के कुछ सिपाहियों की गाड़ियां भी इस धंधे में बेखौफ फल फूल रही है और सुरक्षा की दृष्टि से वे गाडियां बिना नंबर प्लेट दौड़ रही है और खाकी का रौब दिखाकर रायल्टी भी कम थी जा रही है । कहना उचित होगा कि सैया भये कोतवाल तो डर काहे का से आगे बढ़कर सैया ही कोतवाल और सैया ही लूटमार तो मेरा क्या जायेगा , इस चौकी पर फीट बैठ रहा है ।
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