मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस यानी एलपीजी सिलेंडर को लेकर कई जगहों पर दबाव की स्थिति बन रही है। हाल ही में सरकार ने भी गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की थी, जिसमें कमर्शियल सिलेंडर करीब 150 रुपये और घरेलू सिलेंडर लगभग 60 रुपये महंगा हुआ था।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 1 अप्रैल से एक बार फिर एलपीजी के दाम बढ़ सकते हैं।
हर साल बदलते हैं नियम, कीमतों में भी होता है बदलाव
भारत में हर साल 1 अप्रैल से कई आर्थिक बदलाव लागू होते हैं। इसी के तहत एलपीजी की कीमतों की समीक्षा भी की जाती है। हालांकि अभी तक सरकार या तेल कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात संकेत दे रहे हैं कि राहत मिलना मुश्किल हो सकता है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण तेल और गैस की कीमतें लगातार ऊंचाई पर बनी हुई हैं, जिससे कटौती की संभावना कमजोर नजर आ रही है।
किन आधारों पर तय होती है गैस की कीमत
एलपीजी सिलेंडर की कीमत किसी एक कारण से तय नहीं होती, बल्कि कई आर्थिक और वैश्विक कारकों का इसमें योगदान होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, सरकारी सब्सिडी, टैक्स, ट्रांसपोर्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन लागत जैसे पहलू अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं।
इनमें से किसी भी कारक में बदलाव आता है तो उसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है।
मिडिल ईस्ट तनाव का सीधा असर
मौजूदा समय में मिडिल ईस्ट में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। खास तौर पर ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की खबरों ने वैश्विक बाजार को हिला दिया है। यह वही रास्ता है जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस की आपूर्ति होती है।
इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में तेजी आई है। एलपीजी के दामों में भी करीब 11 से 13 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया है।
1 अप्रैल को क्या मिल सकती है नई कीमत
अगर मौजूदा हालात लंबे समय तक बने रहते हैं, तो आने वाले दिनों में एलपीजी की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। भले ही अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है, लेकिन वैश्विक संकेत यही बता रहे हैं कि कीमतों में इजाफा संभव है।
Post a Comment