पत्रकार की कलम से।
रिपोर्टर राकेश कुमार साहू जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़ राज्य।
महान छत्तीसगढ़ी पारिवारिक फिल्म जो की 30 जनवरी से प्रदर्शित हो रही थी और प्रदर्शित की कंडीशन में निर्माता के द्वारा विशेष प्रचार प्रसार कार्य नहीं करने के कारण फिल्म सुपर फ्लॉप साबित हुई है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रिंट मीडिया ऑनलाइन ऑफलाइन के माध्यम से जितना प्रचार प्रसार होना था उतना प्रचार प्रसार कार्य नहीं हुआ जिसके चलते फिल्म सुपर फ्लॉप साबित हो चुकी है कहा जाता है की फिल्म को निर्माण कार्य करने के पश्चात निर्माता के माध्यम से विशेष रुचि लेना चाहिए मगर विशेष रुचि नहीं लिया नए निर्माता है उनको तो सोचना चाहिए कि किस तरह से फिल्म की प्रचार प्रसार कार्य करनी चाहिए प्रेस वालों का सहयोग नहीं लिया यहां तक के की छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री की खबर चलाने वाले संवाददाता राकेश कुमार साहू को भी विशेष जानकारी नहीं दिया जिसके चलते फिल्म सुपर फ्लॉप साबित हो चुका है और हो गया है।
आज 3 फरवरी को छत्तीसगढ़ी फिल्म जो की 6 तारीख को रिलीज होने वाली है सरकारी दामाद जिसका प्रीमियम लीग सो का कार्यक्रम को 3:00 दिखाया गया है जो कि यह अनुचित कार्य है क्योंकि प्राय प्राय सभी फिल्में चाहे हिंदी फिल्म हो चाहे छत्तीसगढ़ी फिल्म हो चाहे भोजपुरी फिल्म हो चाहे किसी भी प्रकार की फिल्में प्रदर्शित होती है जिसका शुभारंभ होता है शुक्रवार के दिन को निश्चित किया जाता है मगर यह फिल्म को अपने रिश्तेदार अपने चहेतेके लिए एवं राजनीतिक व्यक्तियों को लाभ देने के लिए अर्थात राजनीति से जुड़े व्यक्ति को आवश्यक रूप से यह लोग प्रीमियर शो को पहले राज वर्मा ने शुक्रवार के स्थान पर गुरुवार किया था अब इस फिल्म के प्रीमियर के लिए मंगलवार कैसे निश्चित किया है यह तो विधाता ही जाने और इसकी वजह से फिल्म सुपर फ्लॉप साबित हो जाती है।
सबसे बड़ी एवं महत्वपूर्ण विचारणीय प्रश्न यह भी है कि फरवरी महीने में 6 तारीख एवं 13 तारीख को दो-दो फिल्मों का लोकार्पण हो रहा है 6 तारीख को रिलीज हो रही है मंगलसूत्र एवं सरकारी दामाद वहीं दूसरी तरफ धार्मिक फिल्म मोर महादेव एवं आटा चक्की इस तरह से कंट्रोवर्सी साबित हो चुकी है 2025 में भी कंट्रोवर्सी हो चुकी थी मगर आज 2026 में भी कंट्रोवर्सी का जमाना आ गया है जिसके चलते अच्छी नहीं चल पाती फिल्म दर्शकों को समय नहीं मिलता की कौन कौन सी फिल्मों को देखें आज ऐसी स्थिति है कि डिस्ट्रीब्यूटर भी ध्यान नहीं देते समय को एक हफ्ता नहीं चल पाता की दूसरी हफ्ता में नई फिल्म की रूपरेखा तैयार कर ली जाती है और उसे लोकार्पण किया जाता है इससे छत्तीसगढ़ी फिल्मों की लोकप्रियता खत्म होने की कगार में है।
अगर निर्माता को अपनी फिल्म चलानी है तो एक टॉकीज में दो-दो फिल्म का प्रदर्शन किया जा सकता है वह इस तरह से किया जा सकता है कि 12 से 3। 3 से 6 दोनों फिल्मों को दिखाने का समय सुनिश्चित किया जाना अति आवश्यक है।
हमारे संवाददाता राकेश कुमार साहू का कहना यह है कि इस तरह से फिल्मों की पब्लिसिटी नहीं हो पाती जिसकी वजह से फिल्म सुपर फ्लॉप हो जाती है इन सभी चीजों के पीछे अगर किसी व्यक्ति विशेष को लाभ दिलाने की मंशा अगर निर्माता रखते हैं तो इनकी एक नादानी कार्य होगी इसलिए यह कहा जाए की जो भी फिल्में प्रदर्शित होती है उसको समय पर ही प्रदर्शित करें एक साथ दो-दो फिल्में प्रदर्शित न करें और फिल्मों की प्रचार प्रसार का कार्य को जब सर्टिफिकेट के लिए मुंबईजाने की आवश्यकता पड़ती है।
तब से फिल्मों की प्रचार प्रसार का कार्य को आरंभ कर देना चाहिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रिंट मीडिया ऑनलाइन ऑफलाइन वालों को स्क्रिप्ट देना चाहिए और स्वयं को फील्ड वर्क करना चाहिए फील्ड वर्क करने से प्रचार प्रसार कार्य में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आती है जिस तरह से सतीश जैन अपनी फिल्मों की निर्माण करने के पक्ष या निर्माण के दौरान फिल्मों की प्रचार प्रसार कार्य करते हैं जिससे उनकी फिल्म सुपर डुपर हिट हो जाती है आज ऐसी स्थिति है कि निर्माता ही खुद ध्यान नहीं दे पाता जिसकी वजह से तकनीकी कारण की वजह से फिल्म सुपर फ्लॉप साबित हो जाती है।

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