तमनार जनसुनवाई विवाद : विधायक प्रतिनिधि ने PMO और राज्यपाल से की उच्चस्तरीय न्यायिक जाँच की मांग...

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रायगढ़- जिले के तमनार विकासखंड के अंतर्गत गारे-पेलमा सेक्टर-01 कोल ब्लॉक आवंटन को लेकर उपजा विवाद अब गहराता जा रहा है। विधायक प्रतिनिधि और विकासखंड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रूपेश पटेल ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री सहित कई उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर 27 दिसंबर 2025 को हुई अप्रिय घटनाओं की उच्चस्तरीय न्यायिक जाँच कराने का विनम्र अनुरोध किया है।

*संविधान और पेसा कानून के उल्लंघन का आरोप :* आवेदक के अनुसार, तमनार क्षेत्र एक आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है जहाँ संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा अधिनियम (PESA) लागू है। आरोप है कि जिंदल प्रबंधन द्वारा बिना ग्राम सभा की उचित अनुमति और अनुशंसा के कोल ब्लॉक का आवंटन कराया गया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि 8 दिसंबर 2025 को होने वाली जनसुनवाई को नियत स्थल के बजाय गोपनीय ढंग से अन्य स्थान पर 'कुटरचित' दस्तावेजों के माध्यम से पूर्ण दर्शा दिया गया, जिससे ग्रामीणों को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला।

*27 दिसंबर की घटना :* शांतिपूर्ण प्रदर्शन और आकस्मिक हिंसा - रूपेश पटेल ने आवेदन में स्पष्ट किया है कि ग्रामीण 5 दिसंबर से ही शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। उनके अनुसार :

* विवाद का कारण : 27 दिसंबर को पुलिस संरक्षण में कोयला लदे वाहनों को धरना स्थल से निकालने का प्रयास किया गया, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया।
* दुखद मृत्यु : इस दौरान हुई झड़प और अफरा-तफरी में एक ट्रक की चपेट में आने से खुरूसलेंगा के एक बुजुर्ग ग्रामीण की मृत्यु हो गई, जिससे जनआक्रोश भड़क उठा।
* साजिश की आशंका : आवेदक का आरोप है कि प्लांट में हुई तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सुनियोजित थीं, जिसका उद्देश्य आंदोलन को कुचलना था।

*न्याय और निष्पक्षता की अपील :* रूपेश पटेल ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए कहा है कि घटना के समय वे अपने कार्यालय में उपस्थित थे, जिसके पर्याप्त CCTV साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने अधिकारियों से निवेदन किया है कि :

* पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष न्यायिक जाँच की जाए ताकि निर्दोष ग्रामीणों को राहत मिल सके।
* एक महिला आरक्षक के साथ हुई अत्यंत निंदनीय और घृणित घटना के वास्तविक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
* राजनीतिक द्वेषवश की जा रही 'मिथ्या' कार्यवाहियों पर रोक लगाई जाए।

*प्रशासनिक रुख पर टिकी निगाहें :* आवेदक ने विश्वास व्यक्त किया है कि उनके पास उपलब्ध वीडियो साक्ष्य और CCTV फुटेज सत्य को प्रमाणित करेंगे। अब देखना यह है कि शासन और प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और क्या क्षेत्र में शांति बहाली के लिए न्यायिक जाँच के आदेश दिए जाते हैं।

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