इंदौर शर्मसार: CAG की चेतावनी को कचरे में फेंका और निगल ली गईं 15 जिंदगियां, इस मौत का जिम्मेदार कौन?

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Indore Water Crisis: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने इंदाैर दूषित पानी मामले में कहा कि यह अत्यंत दुखद और चिंताजनक है कि ‘स्वच्छ शहर’ के रूप में चर्चित इंदौर में दूषित पानी पीने से लगातार मौतें हो रही हैं. खबरों के अनुसार अभी तक 15 लोगों की मृत्यु हो चुकी है.


लगातार हो रही मौतें हमारी व्यवस्थागत कमजोरी और वर्षों से ज्ञात कमियों का परिणाम हैं. साथ ही भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट संख्या 3/2019 में इंदौर एवं भोपाल की जलप्रदाय व्यवस्था के बारे में किए गए गंभीर खुलासों और उनकी अनुशंसाओं की अनदेखी भी इसका कारण है.


रिपोर्ट के प्रमुख अंश इस प्रकार थे

इन शहरों में वर्ष 2013 और 2018 के बीच 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के केस रिपोर्ट हुए थे क्योंकि भोपाल के 3.62 लाख परिवारों को और इंदौर के 5.33 लाख, कुल 8.95 लाख परिवारों को शुद्ध पेयजल प्रदाय नहीं किया जा रहा था. इस दौरान इन शहरों से लिए गए 4,481 नमूने पीने लायक नहीं पाए गए थे.

लीकेज कंट्रोल की शिकायत मिलने पर नगर निगमों को निराकरण में 22 से लेकर 108 दिन तक का समय लग रहा था. ऐसे में लोगों की जान कैसे बचाई जा सकती है.

ओवरहेड टंकियों की नियमित सफाई करने का कोई तंत्र अस्तित्व में नहीं था.

इंदौर और भोपाल दोनों नगर निगमों में कोई वॉटर ऑडिट नहीं किया गया था. इसलिए वॉटर सप्लाई सिस्टम का वास्तविक मूल्यांकन नहीं हो सका.

रिपोर्ट के अनुसार (पृष्ठ 12) कुल कच्चे पानी की सप्लाई के मुकाबले वितरण के लिए उपलब्ध पानी का नुकसान 65 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक था. इससे इंदौर नगर निगम में पानी की सप्लाई के खराब मैनेजमेंट सिस्टम का पता चलता है.

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 31 मार्च 2021 को समाप्त वर्ष के लिए जारी रिपोर्ट क्रमांक 2 के पृष्ठ क्रमांक 32 के अनुसार ट्रायल रन पीरियड शुरू होने के बाद हर सोर्स से पानी का सैंपल डिस्ट्रिक्ट या ब्लॉक लेबोरेटरी में कम से कम 15 दिनों में एक बार टेस्ट किया जाना चाहिए था. परंतु ऑडिट में पाया गया कि तय समय पर पानी की क्वालिटी के टेस्ट नहीं किए जा रहे थे.

CAG रिपोर्ट को नजरअंदाज करना गंभीर अपराध

जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया के साथी अमूल्य निधि ने कहा कि CAG जैसे महत्वपूर्ण संस्थान द्वारा जन स्वास्थ्य विषयों पर किए गए गहन ऑडिट और लोगों की जिंदगी बचाने के लिए की गई. अनुशंसाओं को नजरअंदाज करना एक गंभीर अपराध है. क्योंकि इसका खामियाजा हमने 15 लोगों की जान देकर भुगता है.


जन स्वास्थ्य अभियान, मध्य प्रदेश ने आज इंदौर शहर के दूषित पेयजल आपूर्ति के मुद्दे पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटील, लोक स्वास्थ्य अभियान्त्रिकी विभाग मंत्री और मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर देश एवं प्रदेश की जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है. साथ ही CAG रिपोर्ट में किए गए खुलासों के आधार पर पूरे देश और प्रदेश में पेयजल व्यवस्था में सुधार की मांग की है.


पत्र में की गई प्रमुख मांगें

इंदौर सहित प्रदेश के सभी शहरों में वार्डवार स्वतंत्र एवं प्रामाणिक प्रयोगशालाओं से प्रतिवर्ष जल गुणवत्ता परीक्षण अनिवार्य किया जाए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए.

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड निश्चित आवृत्ति पर जल गुणवत्ता का परीक्षण कर उस पर निगरानी रखे.

जल परीक्षण के लिए नमूना संग्रहण सभी जल स्रोतों, सार्वजनिक नलों और कुछ चयनित घरों से किया जाए.

CAG की रिपोर्ट संख्या 3/2019 के अनुसार इन शहरों में वर्ष 2013 और 2018 के बीच 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के केस रिपोर्ट हुए थे. स्वास्थ्य विभाग पिछले एक वर्ष में जलजनित रोगों की विस्तृत रिपोर्ट शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की अलग-अलग जारी करे.

ग्रामीण क्षेत्र में नल जल योजना का क्रियान्वयन हो रहा है, इसलिए प्रत्येक वर्ष पंचायत स्तर पर जल परीक्षण अनिवार्य किया जाए.

आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में 440 बसाहटों के 2,38,963 लोगों को स्वच्छ पीने के पानी की स्थायी व्यवस्था की जाए.

जलप्रदाय पाइपलाइन और सीवेज लाइन को पूरे प्रदेश में पृथक किया जाए.

सरकार भारतीय सार्वजनिक जल मानक तैयार करे और लागू करे.

वार्ड स्तर पर नियमित जल गुणवत्ता निगरानी एवं सार्वजनिक सूचना प्रणाली विकसित की जाए.

मध्यप्रदेश जल नीति जारी की जाए.

प्रदेश के सभी शहरों और कस्बों में पानी, हवा और स्वास्थ्य ऑडिट किया जाए.

स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल के साथ ही शुद्ध हवा और प्रदूषण मुक्त पर्यावरण नागरिकों का मौलिक अधिकार है.


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