छत्तीसगढ़ी सिनेमा में प्रेम कहानियों के साथ लोक-आस्था, तंत्र-मंत्र और रहस्यमयी कथानक को जोड़ने का प्रयोग हमेशा दर्शकों को आकर्षित करता

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छत्तीसगढ़ी सिनेमा में प्रेम कहानियों के साथ लोक-आस्था, तंत्र-मंत्र और रहस्यमयी कथानक को जोड़ने का प्रयोग हमेशा दर्शकों को आकर्षित करता रहा है। इसी कड़ी में फिल्म “का तय मोला मोहनी डारे रे” एक अलग स्वाद लेकर आती है, जहाँ प्रेम सिर्फ दिल से नहीं, बल्कि मोहनी, चुड़ैल और अघोरी की दुनिया से भी टकराता है।


कहानी


फिल्म की शुरुआत जंगल के रहस्यमयी माहौल से होती है, जहाँ गोलू नाम का युवक पेड़ के पास बैठा ममता की तस्वीर देखकर गहरे गम में डूबा होता है। वह आत्महत्या करने की कोशिश करता है और यहीं से फिल्म फ्लैशबैक में चली जाती है।


फ्लैशबैक में कहानी एक मासूम प्रेम से शुरू होती है। सब्ज़ी खरीदते समय गोलू की नजर ममता पर पड़ती है और पहली ही नजर में उसे प्यार हो जाता है। गोलू का ढाबा है, जहाँ ममता अपनी सहेली के साथ नाश्ता करने आती है। छोटी-छोटी घटनाएँ—ममता का गिरा हुआ फोटो, छोड़ी हुई चाय पी लेना—गोलू के प्रेम को और गहरा कर देती हैं, लेकिन ममता इसे पसंद नहीं करती और उसे डाँट देती है।


गाँव का गुंडा लोकेश गोलू को मारता है, मगर ममता गोलू को बचा लेती है। यहीं से गोलू का इम्तिहान शुरू होता है। “मेरे लिए क्या कर सकते हो?”—इस सवाल पर गोलू जान देने तक को तैयार हो जाता है। जंगल में आत्महत्या की कोशिश के दौरान एक चुड़ैल (परेतिन) उसे बचा लेती है और कहानी अलौकिक मोड़ ले लेती है।


मोहनी और उलझता प्रेम


चुड़ैल गोलू को मोहनी देती है ताकि वह ममता को पा सके, लेकिन गलती से मोहनी किसी और लड़की साधना पर गिर जाती है। इसके बाद साधना गोलू के प्रेम में पागल-सी हो जाती है। सामाजिक दबाव, लोकेश की गंदी नीयत, साधना की बेबसी और गोलू की उलझन—कहानी लगातार नया मोड़ लेती रहती है।


इसी बीच एक अघोरी की एंट्री होती है, जो परेतिन की तलाश में है। ममता भी अब गोलू से सच्चा प्यार करने लगती है, लेकिन साधना की मौजूदगी और लगातार हो रही घटनाएँ ममता को तोड़ देती हैं।


क्लाइमेक्स और सस्पेंस


अघोरी साधना की जान के बदले गोलू से परेतिन की मोहनी मांगता है। जंगल में अंतिम टकराव होता है—परेतिन, अघोरी और गोलू के बीच। ममता सब कुछ देखकर गोलू को छोड़ जाती है। अंत में परेतिन ममता को भी मोहनी दे देती है और फिल्म यहीं खत्म होकर अगले पार्ट के लिए दर्शकों को उत्सुक छोड़ देती है।


निर्देशन और प्रस्तुति


फिल्म का प्लस पॉइंट इसकी कहानी का आइडिया है, जो प्रेम, लोक-विश्वास और रहस्य को जोड़ता है। जंगल के दृश्य, तंत्र-मंत्र का माहौल और भावनात्मक संघर्ष दर्शकों को बांधे रखते हैं। हालांकि पटकथा में कहीं-कहीं घटनाएँ तेजी से बदलती हैं, फिर भी सस्पेंस बना रहता है।


“का तय मोला मोहनी डारे रे” उन दर्शकों के लिए है जो पारंपरिक प्रेम कहानी से हटकर कुछ अलग—थोड़ा डर, थोड़ा रहस्य और बहुत सारा ड्रामा—देखना पसंद करते हैं। फिल्म का ओपन एंडिंग इसे सीक्वल के लिए मजबूत आधार देती है।

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