पुलिस और प्रेस को स्वतंत्र कार्य करने का पावर मिलना चाहिए.....

Views पत्रकार की कलम से।                           रिपोर्टर राकेश कुमार साहू जांजगीर चांपा।

भारत सरकार एवं राज्य सरकार के द्वारा दो विभाग को स्वतंत्र कार्य करने की अनुमति होनी चाहिए स्वतंत्र कार्य करने का पावर मिलना चाहिए इसलिए मिलना चाहिए कि किसी भी प्रकार का दबाव नहीं होना चाहिए वह विभाग निम्न प्रकार से है जिसे स्वतंत्र कार्य करने की पावर मिलनी चाहिए।


पुलिस विभाग।


भारत सरकार की एवं राज्य सरकार की प्रमुख सुरक्षा के अंग के रूप में पुलिस विभाग को माना गया है इस विभाग के माध्यम से राज्य के सुरक्षा का जिम्मेदारी रहता है अगर इस विभाग में किसी के विरुद्ध अगर मान लो प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हो जाती है और दर्ज होने के पश्चात राजनीतिक दलों के व्यक्तियों के द्वारा सांसद विधायक मंत्री के द्वारा अपने निजी स्वार्थ को देखते हुए पुलिस विभाग को यह आदेशित कर देता है अगर राजनीतिक दल के किसी व्यक्ति के खिलाफ में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हो जाती है तो सांसद विधायक के द्वारा बचा लिया जाता है और संबंधित अभियुक्त को छोड़ दिया जाता है पुलिस विभाग के द्वारा और पुलिस दबाव में आ जाती है और छोड़ देती है की मंत्री का फोन आ गया की संसद का फोन आ गया की विधायक का फोन आ गया और संबंधित जनप्रतिनिधि के अभियुक्त को छोड़ दिया जाता है और अपराध करने की क्षमता अभियुक्त के ऊपर हावी हो जाता है और वह अपराध के ऊपर अपराध करते जाता है और उसे संरक्षण प्राप्त हो जाता है राजनीतिक संरक्षण जिसके चलते पुलिस विभाग के द्वारा न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया को शिथिल कर दिया जाता है।

अभी वर्तमान में रायगढ़ के तमनार गांव में पुलिस आरक्षक के ऊपर अभद्र कार्य बर्बरता पूर्वक कार्य किया गया है इसमें क्या कलेक्टर जवाब दे पाएगा क्या पुलिस अधीक्षक जवाब दे पाएगा इस संबंध में पुलिस को स्वतंत्र कार्य करने का विशेष पावर मिलना चाहिए।

जिस तरह से महिला आरक्षक के ऊपर कपड़े फाड़ने अर्थात निर्वस्त्र करने के पश्चात महिला की इज्जत के साथ में खिलवाड़ किया गया और जिस तरह से अभियुक्त को आरोपी गण को पकड़ा गया है और जेल दाखिल किया गया जिस तरह से महिला आरक्षक के ऊपर बार-बरतापूर्वक कार्य किया गया इस प्रकार से पुलिस प्रशासन के द्वारा आरोपी गण अभियुक्त को भी बर्बरता पूर्वक कार्य करते हुए उनको जेल दाखिल करना था निर्वस्त्र करके भारी पब्लिक के बीच से उनको निर्वस्त्र करते हुए जेल दाखिल करने का आवश्यकता था मगर वह इसलिए नहीं हुआ की पुलिस विभाग के ऊपर राजनीतिक दलों का दबाव रहता है जिसके वजह से स्वतंत्र कार्य नहीं कर पाती।


प्रेस विभाग।


पत्रकारों को भी स्वतंत्र कार्य करने का अनुमति तो रहता है मगर उनके ऊपर भी राजनीतिक दलों का दबाव बना रहता है अगर किसी भी विधायक किसी भी सांसद किसी भी मंत्री के विरुद्ध या किसी विभाग की अधिकारी कर्मचारी लापरवाही करता है और लापरवाही का मामला जब उजागर हो जाता है और वह मामला उजागर होने के पश्चात पेपर में प्रकाशन हो जाता है तो राजनीतिक दलों के द्वारा दबाव बना दिया जाता है कि मेरे विरुद्ध में तुमने क्यों खबर को छापा वहीं पर शान द्वारा यह कहा जाता है कि पत्रकार स्वतंत्र है सरकार का चौथा स्तंभ है सच का आईना है जो की सरकार की अच्छी खबर भी रखती है बुरी खबर भी रखती है तो अगर बुराई वाली मामला उजागर होती है और वह छप जाता है जो छापने के पक्ष में एक छोटे से कर्मचारियों से लेकर नेता राजनीति करने वाले भी चंगुल में फंस जाते हैं और उनका नाम आ जाता है और छप जाता है तो वही मंत्री विधायक पत्रकार के ऊपर दबाव बनाता है बोलता है कि तुम्हारी लाश गिरा दूंगा बोलता है तो यह कहां की स्वतंत्र पत्रकारिता हो रही है दबाव में पत्रकार को कम करना पड़ता है पत्रकार सुरक्षा कानून पारित होना चाहिए।

कई ऐसे राज्य के थाना है जहां पर राजनीतिक दलों की दबाव से पत्रकारों के विरुद्ध मामला दर्ज कर दी जाती है राजनीतिक दलों के इशारे पर पत्रकारों के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कर लिया जाता है और जेल दाखिल कर दिया जाता है केवल राजनीतिक दलों के इशारों पर ही पुलिस काम करती है पत्रकारों को किसी भी प्रकार की छूट नहीं दिया है पत्रकारों के ऊपर भी राजनीतिक दलों का दबाव बना रहता है जिसकी वजह से अच्छी एवं बुरी खबर भी नहीं लग पाती शासन की नीतिगत सिद्धांतों का।

हमारे संवाददाता कहते हैं कि जिस तरह से आज महिला आरक्षक के साथ बर्बरता पूर्वक कार्य किया गया एवं मुख्यमंत्री के गृह जिले के जनसंपर्क विभाग के जनसंपर्क अधिकारी के द्वारा एक संपादक के विरुद्ध झूठा प्रकरण दर्ज कर एवं करोड़ का मानहानि का जो केस रजिस्टर्ड किया जनसंपर्क अधिकारी वह केवल मुख्यमंत्री के इशारे पर कार्य करते हुए संपादक के विरुद्ध में कार्यवाही कर दिया तो पत्रकार को भी स्वतंत्र नहीं किया गया है उसको भी दबाव पूर्वक रखा गया है।

हमारे संवाददाता यह भी कहते हैं कि पुलिस विभाग एवं प्रेस विभाग को स्वतंत्र कार्य करने की अनुमति मिलनी चाहिए जिससे सरकार की अच्छी नीति एवं बुरी नीति का परिणाम को जनता तक लाने का कार्य करते हैं पुलिस सही रूप से जांच करने के पश्चात अपराधी घोषित करें और जो सही अपराधी है उसी के खिलाफ में समाचार का प्रकाशन करने का अवसर मिलना चाहिए पत्रकारों को।

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