भाजयुमो नेता विकास गुप्ता का सख़्त संदेश: युवा विदेशी संस्कृति नहीं, भारतीय मूल्यों को अपनाएं

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 *पुसौर* :- भाजयुमो मंडल मीडिया प्रभारी पुसौर विकास गुप्ता ने आज जारी एक प्रेस वक्तव्य में कहा कि वर्तमान समय में प्रेम संबंधों की परिभाषा तेजी से बदलती जा रही है, जो समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी प्रेम को केवल आकर्षण, दिखावे और क्षणिक भावनाओं तक सीमित कर रही है, जबकि प्रेम का वास्तविक अर्थ त्याग, संयम, सम्मान और जिम्मेदारी से जुड़ा होता है।

विकास गुप्ता ने कहा कि विशेष रूप से फरवरी माह के दौरान कुछ युवा लड़के-लड़कियों द्वारा खुलेआम गलत एवं अश्लील गतिविधियों का प्रदर्शन किया जाता है, जो न केवल सामाजिक मर्यादाओं के विपरीत है, बल्कि भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों पर भी सीधा आघात है। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति धीरे-धीरे सामान्य बनती जा रही है, जो भविष्य में समाज के लिए घातक सिद्ध हो सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि आज की युवा पीढ़ी विदेशी सभ्यता और पश्चिमी संस्कृति को बिना सोचे-समझे अपने जीवन में उतार रही है। विदेशी संस्कृति के अंधानुकरण के कारण युवा अपने संस्कार, परंपराएं और नैतिक मूल्यों को भूलते जा रहे हैं। परिणामस्वरूप रिश्तों की पवित्रता, परिवार की गरिमा और सामाजिक अनुशासन कमजोर होता जा रहा है।

विकास गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रेम का अर्थ सार्वजनिक अश्लीलता, अनुशासनहीनता या सामाजिक नियमों की अवहेलना नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि प्रेम एक निजी और पवित्र भावना है, जिसे मर्यादा और संस्कार के दायरे में रहकर ही व्यक्त किया जाना चाहिए। आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा पीढ़ी को प्रेम के सही अर्थ और उद्देश्य को समझाया जाए।

उन्होंने कहा कि युवा चरित्र निर्माण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि आज युवाओं के चरित्र, सोच और दिशा पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाला भविष्य सामाजिक विघटन और नैतिक पतन की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे युवाओं के साथ संवाद बढ़ाएं और उन्हें सही-गलत का अंतर समझाएं।

भाजयुमो मंडल मीडिया प्रभारी विकास गुप्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव प्रेम, सम्मान और संयम की शिक्षा देती आई है। हमारी परंपराओं में प्रेम केवल दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना से जुड़ा होता है। आज आवश्यकता है कि युवाओं को इस सांस्कृतिक दृष्टिकोण से जोड़ा जाए, न कि केवल सोशल मीडिया और दिखावटी रिश्तों के भरोसे छोड़ा जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म युवाओं की सोच को गहराई से प्रभावित कर रहे हैं। इन माध्यमों पर फैलने वाली अश्लीलता और भ्रामक सामग्री युवाओं के मन-मस्तिष्क पर गलत प्रभाव डाल रही है। ऐसे में समाज और शासन दोनों की जिम्मेदारी है कि युवाओं को सही दिशा देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

अंत में विकास गुप्ता ने कहा कि “आज हमें प्रेम संबंधों पर बहस नहीं, बल्कि सोच की पीढ़ी तैयार करने की आवश्यकता है। ऐसी पीढ़ी, जो संस्कारवान हो, जिम्मेदार हो और समाज व राष्ट्र के प्रति अपना दायित्व समझे।” उन्होंने सभी युवाओं से अपील की कि वे अपने आचरण, व्यवहार और सोच में संयम रखें तथा भारतीय संस्कृति और मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाएं।

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