पत्थलगांव : राष्ट्रीय पर्व पर 'सिस्टम' का सरेंडर; जब तिरंगे की आन में धूप से बिलबिला उठे नौनिहाल!..

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*पत्थलगांव।* एक ओर देश अपनी आजादी का 77वां गणतंत्र दिवस गर्व से मना रहा है, वहीं जशपुर जिले के पत्थलगांव हाई स्कूल मैदान से आई तस्वीरों ने प्रशासन के 'भव्य' दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। जिस समारोह को अनुशासित और गरिमामय होना चाहिए था, वह जिम्मेदारों की घोर लापरवाही और उदासीनता के कारण अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गया।
सवाल यह है कि क्या राष्ट्रीय पर्व केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं?
*धूप में तपे बच्चे, शिक्षक बने 'ढाल' -*समारोह की सबसे विचलित करने वाली तस्वीर तब सामने आई जब देश का भविष्य कहे जाने वाले स्कूली बच्चे चिलचिलाती धूप में घंटों खड़े रहने को मजबूर हुए। आलम यह था कि बच्चों को धूप से बचाने के लिए शिक्षकों को बैंड सीट और अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ा। यह दृश्य प्रशासन की संवेदनहीनता को चीख-चीख कर बयां कर रहा था।

*चौथे स्तंभ का अपमान, आम जन परेशान :*व्यवस्था ऐसी कि 'अतिथि' तो मंच पर विराजे थे, लेकिन लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यानी पत्रकार दीर्घा नदारद थी। कवरेज के लिए पहुंचे मीडिया प्रतिनिधियों को खड़े रहकर काम करना पड़ा। यही हाल आम नागरिकों का भी रहा; कुर्सियों की भारी कमी के चलते लोग पंडाल के बाहर और मैदान के कोनों में खड़े होकर कार्यक्रम देखने को मजबूर हुए।

*सत्ता और प्रशासन की मौजूदगी में 'मौन' लापरवाही :*हैरानी की बात यह है कि यह पूरी बदहाली क्षेत्रीय विधायक गोमती साय और जिले के आला प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में घटित हुई। जब शासन-प्रशासन के दिग्गज वहां मौजूद थे, तब भी किसी ने इन अव्यवस्थाओं को सुधारने की जहमत क्यों नहीं उठाई?

*तीखे सवाल जो जवाब मांगते हैं :*
* क्या टेंट और बैठने की व्यवस्था के लिए जारी हुआ फंड फाइलों में ही दफन हो गया?
* नौनिहालों को धूप में तपाने वाले अधिकारियों पर क्या 'गाज' गिरेगी?
* क्या विधायक महोदया ने इस अव्यवस्था पर आयोजनकर्ताओं की क्लास ली?

> गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय गौरव के पर्व पर ऐसी लापरवाही न केवल शर्मनाक है, बल्कि उन देशभक्तों का भी अपमान है जो इस दिन को उत्सव की तरह देखते हैं। अब देखना यह है कि क्या कलेक्टर महोदय इस मामले में जिम्मेदारों पर 'हंटर' चलाएंगे या यह खबर भी फाइलों के ढेर में दबकर दम तोड़ देगी।

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