बालको नहीं , कोरबा में कॉरपोरेट राज चल रहा है - गरीबों की रोजी छीनने वाला प्रबंधन किसके सरंक्षण में? : जय सिंह अग्रवाल

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कोरबा 14 जनवरी। भारत एल्युमिनियम कंपनी मिमिटेड (बालको ) प्रबंधन ने अब कानून, सविधान और

प्रशासन—तीनों को खुल चुनौत दे दी है। कोरबा में आज स्थिती यह है कि निर्वाचित सरकार नहीं, बल्कि

कॉरपोरेट कंपनी शासन चला रहा है, आखिर किसके संरक्षण में बालको स्वयं को कानून से ऊपर मान रहा है।

पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल कहा कि बालको टाउनशिप में 40–45 वर्षों से ठेला-गुमटी , पान

दुकान, मोची , दर्जी, नाई, रजाई-गद्दा निर्माण जैसे छोटे व्यवसाय से जीवन यापन कर रहे गरीब परिवारों को नोटिस देकर हटाना सीधा-सीधा गरीबों पर हमला है ।

उन्होंने कहा- बालको प्रबंधन को यह गलतफहमी हो गई है कि वह सरकार से ऊपर है गरीबों की रोजी छीनना श्रमिकों को अपमानित करना और पर्यावरण को बर्बाद करना है यही उसका विकास मॉडल है , जय सिंह अग्रवाल ने आरोप लगाया कि - बालकों में ठेका श्रमिकों और कर्मचारियों का दो वर्षों से लगातार मानसिक उत्पीड़न और अपमान किया जा रहा है श्रम कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है लेकिन अनेक शिकायतों के बाद भी शासन की चुप्पी सवालों के घेरे में है।

उन्होंने कहा कि विस्तार परियोजना की जनसुनवाई में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का वादा किया गया था लेकिन आज तक किसी भी स्थानीय युवक को परियोजना विस्तार कार्य में रोजगार नहीं दिया गया। यह सिर्फ वादा खिलाफी नहीं बल्कि जनता के साथ धोखा और प्रशासन की मिली भगत का प्रमाण है जय सिंह अग्रवाल ने कहा कि बालकों द्वारा —

 कई एकड़ शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा,

 बिना अनुमति हजारों पेड़ों की कटाई ,

 दशकों पुरानी सार्वजनिक सड़क को बंद करना ,

 इंदिरा मार्केट की ड्रेनेज व्यवस्था चौपट करना ,

 शांति नगर में जमीन लेकर कूलिंग टावर बनाना बिना मुआवजा और रोजगार

 NGT नियमों के विरुद्ध फ्लाई एश का निपटान

जैसे गंभीर अपराध किए गए हैं, लेकिन कार्यवाही शून्य है।

उन्होंने चौंकाने वाला आरोप लगाते हुए कहा —

“मेरे पत्र के बाद डीएफओ ने g- 9 परियोजना रोका गया था लेकिन दो दिन के भीतर किसी" ऊपर से आए आदेश "के बाद काम शुरू कर दिया गया। यह बताता है कि बालकों के पीछे कौन खड़ा है जय सिंह अग्रवाल ने कहा कि इन सभी मामलों में पीएमओ से लेकर मुख्यमंत्री तक 14 पत्र भेजे, लेकिन नतीजा शून्य रहा।

“जब गरीब का ठेला हटाया जाता है, तब प्रशासन तुरंत सक्रिय हो जाता है, लेकिन जब कॉर्पोरेट कानून तोड़ता है तब सब चुप हो जाते हैं।

उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी—

“यदि छोटे व्यवसाईयों को हटाने की कार्यवाही तत्काल नहीं रोकी गई श्रमिकों को न्याय नहीं मिला और बालकों के अवैधानिक गतिविधियों पर कार्यवाही नहीं हुई तो यह मुद्दा सड़क से सदन तक जाएगा आंदोलन होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और बालको प्रबंधन की होगी।

जय सिंह अग्रवाल ने की है कि—

1. छोटे व्यवसाईयों के सभी नोटिस तत्काल रद्द किया जाए।

2. श्रमिक उत्पीडन व जनसुनवाई उल्लंघन की उच्च स्तरीय जाँच हो,

3. बालकों के अवैध अतिक्रमण व पर्यावरण अपराधों पर f .i .r. व दंडात्मक कार्रवाई हो ।

4. स्थानीय जनता, श्रमिकों और गरीब व्यापारियों को संवैधानिक संरक्षण मिले ।

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