ब्लैकमेलिंग की साजिश फेल: 'जिंदा नाला' के नाम पर फैलाया जा रहा झूठ बेनकाब, जांच में छाल ट्रांसपोर्ट को मिली क्लीन चिट...

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 आर्थिक उगाही के लिए रची गई थी डोमनारा खदान को बदनाम करने की साजिश, जल संसाधन विभाग ने दावों को बताया फर्जी...


रायगढ़/छाल।औद्योगिक क्षेत्रों में सक्रिय कुछ 'सफेदपोश' साजिशकर्ताओं द्वारा निजी स्वार्थ और आर्थिक लाभ के लिए चलाया जा रहा झूठ का व्यापार अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। SECL के छाल उपक्षेत्र अंतर्गत खरसिया डोमनारा खुली खदान में 'जिंदा नाला' पाटने के नाम पर जो शोर मचाया जा रहा था, वह केवल छवि धूमिल करने और अवैध वसूली का एक जरिया मात्र निकला। जल संसाधन विभाग की ताजा जांच रिपोर्ट ने इन तथाकथित शिकायतों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि मौके पर कोई भी नियम विरुद्ध कार्य नहीं हो रहा है।


*षड्यंत्र का पर्दाफाश : जांच में नहीं मिला कोई अवरोध -*हाल ही में कुछ स्वयंभू समाजसेवियों और भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह दावा किया गया था कि छाल ट्रांसपोर्ट (प्रो. अनीता गर्ग) द्वारा नाले को फ्लाई एश से पाटा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जल संसाधन संभाग रायगढ़ की टीम ने 6 जनवरी को मौके पर दबिश दी। निरीक्षण में पाया गया कि नाले के प्राकृतिक बहाव में रत्ती भर भी डंपिंग नहीं की गई है। नाला पूरी तरह अवरोध मुक्त है। प्रशासन की इस रिपोर्ट ने झूठी खबरें प्लांट करने वालों के मुंह पर करारा तमाचा जड़ा है।


*नियमों के तहत हो रहा कार्य :* सच्चाई यह है कि खदान के पुराने गड्ढे में फ्लाई एश भरने का कार्य डीबी पावर को SECL द्वारा विधिवत प्रक्रिया के तहत आवंटित किया गया है। प्रो. अनीता गर्ग ने बताया कि :


* यह कार्य पूर्णतः सरकारी गाइडलाइंस के तहत किया जा रहा है।

* स्थानीय ग्रामीणों की सहमति और उपस्थिति में कार्य संचालित है।

* जिस नाले का हौव्वा खड़ा किया जा रहा है, वह एक बरसाती नाला है जो वर्तमान में सूखा है और उसके अस्तित्व को कोई खतरा नहीं है।


*उगाही गिरोह पर प्रहार :* प्रेस को जारी तीखे बयान में अनीता गर्ग ने कहा कि, "कुछ लोग मेरे कार्य और प्रतिष्ठा को केवल इसलिए निशाना बना रहे हैं ताकि वे आर्थिक लाभ उठा सकें। समाचारों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना और अधिकारियों को गुमराह करना इनकी कार्यशैली बन गई है।" उन्होंने चेतावनी दी है कि भ्रामक समाचारों के जरिए उनकी छवि खराब करने वालों के खिलाफ अब वे कानूनी कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगी।


*प्रशासनिक क्लीन चिट मिलने के बाद अब यह सवाल उठता है कि बिना तथ्यों की जांच किए भ्रामक खबरें चलाने वाले इन तत्वों पर लगाम कब लगेगी? डोमनारा खदान का मामला अब पूरी तरह साफ है - काम पूरी तरह कानूनी है, और आरोप पूरी तरह फर्जी।*

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