पोराबाई नकल कांड: 18 साल बाद न्याय, फर्जी टॉपर को मिली सजा...

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जांजगीर-चांपा - बिर्रा छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) की 12वीं बोर्ड परीक्षा से जुड़ा बहुचर्चित पोराबाई नकल प्रकरण आखिरकार 18 साल बाद अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। वर्ष 2008 में बिर्रा परीक्षा केंद्र से परीक्षा में शामिल हुई पोरा बाई ने 500 में से 484 अंक हासिल कर प्रदेश की टॉपर होने का दावा किया था।
हालांकि, परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद शिक्षा मंडल के तत्कालीन सचिव को उत्तर पुस्तिकाओं की लिखावट को लेकर संदेह हुआ। जांच कराई गई तो यह स्पष्ट हुआ कि परीक्षा में लिखी गई उत्तर पुस्तिका छात्रा की नहीं थी, बल्कि किसी अन्य व्यक्ति से पेपर लिखवाया गया था। इसके अलावा अपात्र होते हुए भी परीक्षा में प्रवेश दिलाने और जालसाजी किए जाने के प्रमाण सामने आए।
मामले की जांच के बाद बम्हनीडीह थाना में अपराध दर्ज किया गया और जेएमएफसी न्यायालय चांपा में चालान पेश किया गया। लंबी सुनवाई के बाद वर्ष 2020 में निचली अदालत से आरोपी को राहत मिली थी, लेकिन अभियोजन पक्ष ने फैसले के खिलाफ अपील दायर की।
अपील पर सुनवाई करते हुए द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश (2nd ADJ) गणेश राम पटेल ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए आरोपी को दोषी ठहराया और सजा सुनाई। इस फैसले के बाद शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और परीक्षा की विश्वसनीयता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल और चर्चा शुरू हो गई है।

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